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चंडीगढ़ कोर्ट में बड़ा सियासी ड्रामा! मजीठिया ने बागी अकाली नेताओं के छुए पैर, क्या फिर होगा एकजुट अकाली दल?

Punjab Politics: चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बिक्रम सिंह मजीठिया ने बागी नेताओं प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सुरजीत सिंह रखड़ा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

👤 Ashwani Kumar 25 Feb 2026 02:00 PM

शिरोमणि अकाली दल की राजनीति में उस समय नया मोड़ देखने को मिला जब चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर में एक अप्रत्याशित मुलाकात ने सबका ध्यान खींच लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने अलग राह पर चल रहे दिग्गज नेताओं प्रेम सिंह चंदुमजरा और सुरजीत सिंह रखरा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

अचानक मुलाकात, गहरे संकेत

कोर्ट कॉम्प्लेक्स में हुई इस मुलाकात के दौरान माहौल काफी सौहार्दपूर्ण बताया गया। नेताओं के बीच कुछ समय तक गंभीर चर्चा भी हुई। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक बातचीत महज शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि पार्टी के मौजूदा हालात पर भी विचार-विमर्श हुआ।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। राजनीतिक हलकों में इसे अकाली दल के भीतर चल रही खींचतान के बीच सुलह की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

बगावत के बाद बदले समीकरण

पिछले कुछ समय से अकाली दल आंतरिक मतभेदों से जूझ रहा है। पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सुरजीत सिंह रखड़ा और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अलग राह चुनी थी। उन्होंने ‘शिरोमणि अकाली दल सुधार लहर’ के नाम से अपनी अलग पहचान बनाई थी। इस कदम ने पार्टी के भीतर दो धड़े स्पष्ट कर दिए थे। ऐसे में मजीठिया का सार्वजनिक रूप से सम्मान जताना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है कि पार्टी पुराने मतभेद भुलाकर आगे बढ़ना चाहती है।

एकता की ओर कदम?

बिक्रम सिंह मजीठिया पहले भी सार्वजनिक मंचों से पुराने साथियों से दोबारा एकजुट होने की अपील कर चुके हैं। अब कोर्ट में हुई यह मुलाकात उन अपीलों को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की बदलती सियासी परिस्थितियों में अकाली दल के लिए एकजुट रहना जरूरी है। यदि वरिष्ठ नेता फिर से एक मंच पर आते हैं, तो यह पार्टी के लिए नई ऊर्जा का कारण बन सकता है।

फिलहाल सबकी नजरें अकाली राजनीति के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यह नम्रता और सम्मान का इशारा दोनों धड़ों को करीब लाएगा? या यह सिर्फ एक शिष्टाचार भरी मुलाकात थी? आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और बयानों से स्थिति और साफ हो सकती है। लेकिन इतना तय है कि चंडीगढ़ कोर्ट में दिखा यह दृश्य पंजाब की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ गया है।