Logo

पंजाब में पैसा तो बढ़ा, लेकिन खतरा भी साथ आया! आय में उछाल के बीच कर्ज ने बढ़ाई चिंता

Punjab economy growth: पंजाब में पिछले तीन सालों में प्रति व्यक्ति आय में 19% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो आर्थिक मजबूती का संकेत है। हालांकि बढ़ते कर्ज की चुनौती अब भी राज्य के सामने बड़ी चिंता बनी हुई है।

👤 Ashwani Kumar 05 Apr 2026 01:41 PM

Punjab per capita income: पंजाब की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। पिछले तीन वर्षों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 19 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो विकास की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। इस बढ़ोतरी से साफ है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं और लोगों की आय में सुधार हुआ है।

लगातार बढ़ रही प्रति व्यक्ति आय

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में पंजाब की प्रति व्यक्ति आय 1,85,802 रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 2,05,374 रुपये हो गई। वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा और उछलकर 2,21,197 रुपये तक पहुंच गया। यह तेजी दर्शाती है कि राज्य में आय के स्रोत बढ़ रहे हैं और आर्थिक मजबूती आ रही है। अधिक आय का सीधा असर लोगों की जीवनशैली पर भी पड़ता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आवास और बेहतर खानपान तक पहुंच आसान होती है, जिससे जीवन स्तर में सुधार आता है।

अन्य राज्यों से तुलना

पंजाब की तुलना अगर अन्य राज्यों से करें तो यह कई बड़े राज्यों से आगे निकल चुका है। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में पंजाब की प्रति व्यक्ति आय काफी अधिक है।

हालांकि, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश अभी भी इस मामले में पंजाब से आगे हैं। वर्ष 2024-25 में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 3,53,182 रुपये और हिमाचल प्रदेश की 2,56,137 रुपये दर्ज की गई है, जो पंजाब से ज्यादा है।

विकास के पीछे सरकार के प्रयास

राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें कौशल विकास, रोजगार के नए अवसर, उद्यमिता को बढ़ावा और व्यापार को आसान बनाना शामिल है। इसके अलावा, सरकार लोगों की आय के स्थायी स्रोत तैयार करने और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इन प्रयासों का असर धीरे-धीरे आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।

कर्ज बना बड़ी चुनौती

हालांकि विकास के इस सफर में पंजाब के सामने एक बड़ी चुनौती भी है-बढ़ता कर्ज। वर्ष 2024-25 में राज्य पर कुल बकाया कर्ज 3,79,963 करोड़ रुपये से ज्यादा था, जो 2026-27 तक बढ़कर 4,47,754 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।