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10वीं के स्टूडेंट्स ध्यान दें! अब कॉपियां नहीं, स्क्रीन पर होगा फैसला, PSEB का बड़ा डिजिटल धमाका

PSEB Board Exams 2026: पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (PSEB) ने 10वीं कक्षा की कॉपियों की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब उत्तर पुस्तिकाएं ऑन-स्क्रीन यानी कंप्यूटर पर जांची जाएंगी. हर पेज पर क्यूआर कोड होगा, जिससे स्कैनिंग और डिजिटल प्रोसेसिंग सुरक्षित रहेगी.

👤 Ashwani Kumar 14 Feb 2026 10:37 AM

पंजाब में बोर्ड परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया अब पहले से अलग होने जा रही है. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) ने तय किया है कि इस बार 10वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं ऑन-स्क्रीन यानी कंप्यूटर पर जांची जाएंगी. इससे नतीजे जल्दी और ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से घोषित किए जा सकेंगे.

शिक्षा मंत्री ने दी मंजूरी

इस नए सिस्टम को पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने मंजूरी दे दी है. इस साल इसे पहले सिर्फ एक विषय में लागू किया जाएगा. अगर यह सफल रहा, तो बाद में बाकी सभी विषयों में भी इसे शुरू कर दिया जाएगा.

बोर्ड ने सितंबर 2025 की पूरक परीक्षाओं में इस सिस्टम का ट्रायल भी किया था. उस समय करीब 23 हजार कॉपियां कंप्यूटर पर जांची गई थीं और परिणाम अच्छे रहे थे.

हर पेज पर होगा क्यूआर कोड

नई आंसर शीट के हर पेज पर एक यूनिक क्यूआर कोड छापा जाएगा. यह क्यूआर कोड हर छात्र की कॉपी को अलग पहचान देगा, जिससे गड़बड़ी या कॉपी बदलने की आशंका लगभग खत्म हो जाएगी. परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल सिस्टम में अपलोड किया जाएगा. इसके बाद परीक्षक केंद्रीय ऑनलाइन डैशबोर्ड पर लॉग-इन करके कॉपियों की जांच करेंगे.

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले से तय मार्किंग स्कीम मौजूद होगी, जिससे सभी परीक्षक एक समान तरीके से अंक देंगे. साथ ही, अंकों का जोड़ अपने आप हो जाएगा. इससे टोटलिंग की गलतियां नहीं होंगी और रिजल्ट अधिक सटीक बनेंगे.

जल्दी आएंगे रिजल्ट, बढ़ेगी पारदर्शिता

पीएसईबी के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक, इस नए तरीके से रिजल्ट जल्दी आएंगे और जांच प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी. शिक्षक भी डिजिटल माध्यम से ज्यादा व्यवस्थित तरीके से काम कर पाएंगे. यह बदलाव पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

शिक्षक भी ऑनलाइन इंटरफेस के जरिए व्यवस्थित और ट्रैकिंग सिस्टम के साथ काम कर सकेंगे. माना जा रहा है कि यह कदम पंजाब की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, तेज और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा.