कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर असंतोष की आहट सुनाई देने लगी है. शशि थरूर के बाद अब पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के हालिया रुख को भी पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. इसकी वजह बनी है राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई एक अहम बैठक, जिसमें सिद्धू को आमंत्रित नहीं किया गया. इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
दरअसल, गुरुवार को दिल्ली में राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक इमरजेंसी बैठक की. इस बैठक का मकसद वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विचार करना था. बैठक में प्रदेश के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी शामिल हुए, लेकिन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े कर दिए.
बैठक के ठीक अगले दिन शुक्रवार दोपहर बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसने सियासी हलकों में हलचल और तेज कर दी. इस वीडियो में सिद्धू शायराना अंदाज में अपनी बात रखते नजर आए. उन्होंने कहा, “जिसने आपको नहीं बुलाया, उसे दफा कीजिए. हर कोई आपके काबिल नहीं होता और कई बार अकेले रहना ही बेहतर होता है.”
हालांकि सिद्धू ने वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस संदेश को कांग्रेस नेतृत्व पर दबी जुबान में निशाना माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर राहुल गांधी की बैठक में उन्हें नजरअंदाज किए जाने से जुड़ी हो सकती है.
यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस के भीतर ऐसे संकेत सामने आए हों. इससे पहले भी सांसद शशि थरूर के बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को पार्टी नेतृत्व से उनकी असहजता के संकेत के रूप में देखा गया था. अब सिद्धू का यह वीडियो इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.
खासतौर पर ऐसे समय में जब कांग्रेस 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है, इस तरह के संकेत पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं. पंजाब कांग्रेस में पहले से ही गुटबाजी की चर्चा रही है और सिद्धू का ताजा रुख उसी पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है.
इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन इतना साफ है कि राहुल गांधी की बैठक और उसके बाद सिद्धू का यह वीडियो पार्टी की आंतरिक एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है.