Punjab News: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. मोगा में हुई ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ रैली को लेकर कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. खैहरा ने इस रैली को “फ्लॉप शो” बताया और कहा कि सरकार ने इसे सफल दिखाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी.
खैहरा का दावा है कि रैली में भीड़ जुटाने के लिए राज्य भर से 2000 से 3000 सरकारी बसें लगाई गईं. उन्होंने कहा कि डीसी, बीडीपीओ और पटवारियों जैसे अधिकारियों को भी लोगों को रैली में लाने के लिए लगाया गया.
उनका आरोप है कि इस आयोजन पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए. टेंट, साउंड सिस्टम और अन्य इंतजामों का ठेका कथित तौर पर दिल्ली की कंपनियों को दिया गया. खैहरा ने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा जनता के हित में खर्च हुआ या किसी और मकसद से?
रैली के मुद्दे के साथ-साथ खैहरा ने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति खुद नशे का शिकार हो, वह लोगों को नशे के खिलाफ शपथ कैसे दिला सकता है. खैहरा ने चुनौती दी कि अगर मुख्यमंत्री शराब नहीं पीते, तो वे सार्वजनिक रूप से इसका ऐलान करें. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.
कांग्रेस विधायक ने रैली में डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी की मौजूदगी पर भी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को किसी राजनीतिक मंच से भाषण नहीं देना चाहिए. इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं.
मोहाली में एक युवक की हत्या का जिक्र करते हुए खैहरा ने मांग की कि हिमाचल और उत्तराखंड की तरह पंजाब में भी बाहरी लोगों के जमीन खरीदने और नौकरियां लेने पर नियंत्रण के लिए कानून बनाया जाए. खैहरा का दावा है कि जब मुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल मंच से बोल रहे थे, तब कई कुर्सियां खाली दिखीं और लोग कार्यक्रम छोड़कर चले गए. उनके मुताबिक जनता अब सरकार के कार्यक्रमों को समझ चुकी है.