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जालंधर में बड़ा जीएसटी घोटाला, 23 फर्जी फर्मों के जरिए 130 करोड़ से ज्यादा का टैक्स फ्रॉड, एक गिरफ्तार

जालंधर में जीएसटी विभाग ने बड़े टैक्स घोटाले का खुलासा करते हुए बीडीए एन्क्लेव निवासी जसविंद्र माही उर्फ हैप्पी को गिरफ्तार किया है।

👤 Saurabh 12 Feb 2026 01:42 AM

जालंधर शहर में जीएसटी चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के टैक्स की हेराफेरी की गई। जीएसटी विभाग ने कार्रवाई करते हुए बीडीए एन्क्लेव निवासी जसविंद्र माही उर्फ हैप्पी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी नामों पर कई शेल कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर टैक्स फ्रॉड को अंजाम दिया।

23 फर्जी फर्में बनाकर दिखाया गया 1000 करोड़ का कारोबार

जांच एजेंसियों के अनुसार, जसविंद्र माही ने अलग-अलग नामों और पते का इस्तेमाल कर कुल 23 फर्जी (शेल) फर्में बनाई थीं। इन फर्मों के जरिए करीब 1000 करोड़ रुपये का फर्जी टर्नओवर कागजों में दिखाया गया। असल में इन कंपनियों का कोई वास्तविक व्यापार नहीं था। इन फर्मों का इस्तेमाल केवल फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत फायदा उठाने के लिए किया गया।

130.50 करोड़ रुपये के जीएसटी फ्रॉड की पुष्टि

जीएसटी विभाग की प्राथमिक जांच में अब तक 130.50 करोड़ रुपये के जीएसटी फ्रॉड की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बिलों के जरिए टैक्स क्रेडिट लिया गया और सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया। विभाग को शक है कि जांच आगे बढ़ने पर फ्रॉड की रकम और ज्यादा हो सकती है।

शहर के 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

घोटाले की सूचना मिलने के बाद जीएसटी विभाग ने जालंधर में एक साथ 6 अलग-अलग स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी के दौरान विभाग को कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। टीम ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इन रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

फर्जी बिलिंग और ITC के दुरुपयोग के मिले सबूत

अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में साफ संकेत मिले हैं कि आरोपी ने फर्जी बिलिंग के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत इस्तेमाल किया। बिना किसी असली लेन-देन के कागजों में खरीद-फरोख्त दिखाई गई और उसी आधार पर जीएसटी रिफंड और क्रेडिट लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई थी।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच

जीएसटी विभाग का कहना है कि इस मामले में अकेला जसविंद्र माही ही नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन फर्जी फर्मों को खोलने में किन-किन लोगों ने मदद की और बैंक खातों के जरिए पैसा कहां-कहां ट्रांसफर किया गया।

कानूनी कार्रवाई होगी और जांच जारी

विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी चोरी के मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। आरोपी के खिलाफ जीएसटी कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है। विभाग का कहना है कि टैक्स चोरी करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी।