चंडीगढ़ प्रशासन ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए कलेक्टर रेट को लेकर नई अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले के बाद अब शहर में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना पहले से महंगा हो जाएगा। प्रशासन ने रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि भूमि के कलेक्टर रेट में 10 से 22 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। नए रेट लागू होने के बाद शहर में जमीन और मकानों की कीमतों में सीधा असर देखने को मिलेगा, जिससे खरीदारों को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
प्रशासन द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, ये नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस बार प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर आम लोगों की तरफ से ज्यादा विरोध देखने को नहीं मिला।
हालांकि, कुछ लोगों ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और रिहायशी जमीन के कलेक्टर रेट में कमी की मांग जरूर उठाई थी। बावजूद इसके प्रशासन ने तय सीमा के भीतर रेट बढ़ाने का फैसला लिया।
नए नियमों के तहत सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट और इंडिपेंडेंट मकानों के कलेक्टर रेट में भी वृद्धि की गई है।
फ्लैट्स के लिए नई दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
इन बढ़ी हुई दरों के कारण अब फ्लैट खरीदना भी पहले की तुलना में ज्यादा महंगा हो जाएगा।
कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी पर पड़ता है। इसका मतलब है कि अब घर या जमीन खरीदने वालों को ज्यादा टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि निवेशकों के लिए यह लंबे समय में फायदेमंद भी साबित हो सकता है।
चंडीगढ़ में कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा जरूर होगा, लेकिन यह कदम बाजार को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है। ऐसे में जो लोग प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब नए रेट्स के हिसाब से अपनी रणनीति बनानी होगी।