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जेल में मुलाकात, बाहर बयान और फिर जमानत! मजीठिया केस पर भगवंत मान का तीखा तंज

Punjab Politics: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पटियाला जेल में बिक्रम मजीठिया और डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मुलाकात पर तीखा तंज कसा है. मान ने ट्वीट कर इशारों में कहा कि जब जेल में मिलने वाले लोग ही जज बनकर फैसले देने लगें, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं.

👤 Ashwani Kumar 03 Feb 2026 10:23 AM

Punjab News: पंजाब की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार मुद्दा बना है शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की जेल में हुई मुलाकात. इस मुलाकात को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया के जरिए तीखा तंज कसा है, जो अब सियासी बहस का विषय बन गया है.

भगवंत मान का ट्वीट बना चर्चा का केंद्र

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा, ‘कल बन जाएं चाहे आज बन जाएं, अदालतों का वहां रब्ब राखा जहां मुलाकाती ही जज बन जाएं.’

मान के इस ट्वीट को सीधे तौर पर जेल में हुई मुलाकात और उसके बाद दिए गए बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका इशारा इस ओर था कि जब आरोपी से मिलने आने वाले लोग खुद ही उसे निर्दोष बताने लगें, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं.

पटियाला जेल में हुई थी मुलाकात

दरअसल, सोमवार को डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों पटियाला जेल पहुंचे थे, जहां बिक्रम सिंह मजीठिया बंद हैं. मुलाकात के बाद जेल परिसर से बाहर आकर बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने मजीठिया पर लगे आरोपों को निराधार बताया और इसे राजनीति से प्रेरित करार दिया. यही बयान अब विवाद की जड़ बन गया.

सीएम का इशारा-न्याय व्यवस्था पर सवाल

भगवंत मान की प्रतिक्रिया से साफ है कि सरकार इस तरह के बयानों को गंभीरता से ले रही है. मुख्यमंत्री का मानना है कि किसी भी आरोपी को लेकर फैसला अदालतों का अधिकार है, न कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का. जब जेल में मिलने वाले लोग ही ‘क्लीन चिट’ देने लगें, तो इससे न्याय की गरिमा प्रभावित होती है.

जमानत मिलने से बढ़ी चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम ने तब और ज्यादा तूल पकड़ लिया, जब डेरा प्रमुख की मुलाकात और बयान के कुछ ही घंटों बाद सुप्रीम कोर्ट से बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत मिल गई. समय के इस संयोग ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे दिया, जबकि सरकार इसे न्यायिक प्रक्रिया से जोड़कर देख रही है.

राजनीति और आस्था के टकराव की बहस

यह मामला सिर्फ एक जेल मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीति, आस्था और न्याय व्यवस्था के बीच के रिश्ते पर भी बहस छेड़ दी है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर पंजाब की सियासत किस दिशा में जाती है.