पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है. खडूर साहिब से सांसद और जेल में बंद अमृतपाल सिंह को संसद के बजट सत्र में शामिल होने के लिए अस्थायी रिहाई देने की मांग को पंजाब सरकार ने खारिज कर दिया है. राज्य सरकार का साफ कहना है कि अगर अमृतपाल सिंह को कुछ समय के लिए भी जेल से बाहर निकाला गया, तो इससे राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा हो सकता है.
इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पिछले महीने पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे कि वह अमृतपाल सिंह की अस्थायी रिहाई की मांग पर सात कार्य दिवसों के भीतर फैसला करे. कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया, बल्कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से रिपोर्ट मंगवाई. इन रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद ही सरकार ने अंतिम निर्णय लिया.
पंजाब सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से 2 फरवरी को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने अमृतपाल सिंह की अस्थायी रिहाई का विरोध किया है. आदेश में अमृतसर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अमृतसर जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. इन रिपोर्टों में कहा गया है कि अमृतपाल की रिहाई से राज्य में अशांति फैल सकती है और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है.
अमृतपाल सिंह के वकील इमान सिंह खारा ने बताया कि उन्हें सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक जवाब मिल गया है. वकील के मुताबिक, सरकार ने पूरी तरह सुरक्षा कारणों को आधार बनाते हुए अस्थायी रिहाई की मांग को ठुकरा दिया है. उनका कहना है कि अब इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.
गौरतलब है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो चुका है. इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक प्रस्तावित है. अमृतपाल सिंह की ओर से मांग की गई थी कि उन्हें सत्र के दौरान कुछ समय के लिए रिहा किया जाए, ताकि वे सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें.
पंजाब सरकार के इस फैसले के बाद अब सबकी नजर अमृतपाल सिंह के अगले कानूनी कदम पर टिकी है. माना जा रहा है कि इस मुद्दे को एक बार फिर अदालत में उठाया जा सकता है. फिलहाल, राज्य सरकार अपने फैसले पर अडिग है और कह रही है कि राज्य की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.