पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में एक कानून की छात्रा के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आने के बाद, न सिर्फ कानून व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है, बल्कि इस मामले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखा राजनीतिक टकराव भी शुरू हो गया है। यह शर्मनाक घटना उस खौफनाक आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्या कांड के महज कुछ महीने बाद सामने आई है, जिसने राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
घटना कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज की है, जहां 25 जून की शाम 7:30 से 8:50 के बीच कॉलेज परिसर के एक कमरे में एक छात्रा के साथ कथित रूप से गैंगरेप किया गया।
मोनोजीत मिश्रा (31) – कॉलेज का पूर्व छात्र और पेशे से वकील
जैब अहमद – वर्तमान छात्र
प्रमित मुखोपाध्याय – वर्तमान छात्र
तीनों को कोर्ट में पेश कर चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण जारी है।
मुख्य आरोपी मोनोजीत मिश्रा की कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें वह TMC नेताओं जैसे कि अभिषेक बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और कजरी बनर्जी के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि मिश्रा TMC का सदस्य है और ममता सरकार उसे बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “यह पहला मामला नहीं है। आरजी कर गैंगरेप और मर्डर केस में भी ममता सरकार ने पीड़िता के परिवार को चुप कराने की कोशिश की थी।”
अमित मालवीय ने ट्वीट कर लिखा, “25 जून को एक महिला लॉ स्टूडेंट के साथ कॉलेज परिसर में गैंगरेप हुआ। बंगाल ममता बनर्जी के शासन में महिलाओं के लिए एक डरावना सपना बन चुका है।”
इस मामले पर अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या TMC की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कोलकाता के मेयर फरहाद हकीम ने सिर्फ इतना कहा कि वे पुलिस से जानकारी लेने के बाद ही कोई बयान देंगे।
इस घटना ने करीब 10 महीने पहले हुए आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस की दर्दनाक यादें ताज़ा कर दी हैं। उस मामले में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी संजय रॉय (कोलकाता पुलिस का 33 वर्षीय नागरिक स्वयंसेवक) को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जिसे कई लोगों ने बेहद कम सजा बताया।
यह नया मामला एक बार फिर से राज्य की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। साथ ही, राजनीतिक दलों की बयानबाजी यह दिखा रही है कि यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि 2026 विधानसभा चुनावों की सियासी जमीन को भी गर्म करने का कारण बन गई है।