नई दिल्ली : अब तक हम लार (या थूक) को सिर्फ मुंह को नम रखने और खाना पचाने में मददगार मानते थे. लेकिन हाल की वैज्ञानिक रिसर्च ने दिखाया है कि लार में हमारी सेहत की छिपी हुई कई अहम जानकारियां होती हैं. ये शरीर के भीतर चल रही बायोलॉजिकल एक्टिविटीस की झलक देती है- और वो भी बिना सुई, खून या दर्द के.
लार में छोटे-छोटे बायोमार्कर होते हैं- जैसे कि डीएनए, आरएनए, प्रोटीन और फैट्स, जो शरीर में चल रही बीमारियों या गड़बड़ियों का संकेत दे सकते हैं. साइंटिस्ट के अनुसार, लार की जांच से निम्नलिखित बीमारियों का पता लगाना संभव हो सकता है, जैसे- डायबिटीज (शुगर),पार्किंसंस (नसों से जुड़ी बीमारी), दिल की बीमारी और कैंसर .
लार की जांच न तो खून लेने जैसी प्रक्रिया मांगती है और न ही बायोप्सी जैसी जटिलता. ये एक गैर-इनवेसिव, आसान और कम खर्चीला तरीका है.
इससे टेस्ट फास्ट होता है और इसे डेंटल क्लिनिक या रूटीन हेल्थ चेकअप में भी किया जा सकता है.
अब लार की जांच के लिए एक नई तकनीक सामने आई है, जिसका नाम है रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी. इसमें लार पर एक खास प्रकार की लेजर रोशनी डाली जाती है, जिससे उसमें मौजूद कैमिकल्स की पहचान की जा सकती है.
ये तकनीक मुंह के कैंसर जैसी बीमारियों को शुरुआती लेवल पर ही पहचान सकती है- जब लक्षण भी नजर नहीं आते. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकते हैं और रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है.
जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ रही है, साइंटिस्ट का मानना है कि लार भविष्य में हेल्थ चेकअप का एक प्रमुख और सस्ता ऑप्शन बन सकती है. ये न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी मदद करेगी. ये प्रोसेस बहुत ही आसान और शानदार है.