What is Open Marriage : भारत में शादी को सदियों से सात जन्मों का पवित्र बंधन माना जाता है. परिवार, समाज और संस्कृति में शादी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन भी होता है. लेकिन जैसे-जैसे समाज और सोच में बदलाव आया है, रिश्तों को लेकर लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं. इन्हीं बदलावों के बीच अब 'ओपन मैरिज' जैसा कांसेप्ट चर्चा में आ गया है.
पहले ये विचार सिर्फ वेस्टर्न देशों में चलता था, लेकिन अब भारत में भी कुछ कपल्स इसे अपनाने लगे हैं. सवाल ये है कि ओपन मैरिज वास्तव में है क्या और क्या ये रिश्तों को आजादी देता है या उन्हें और उलझा देता है?
ओपन मैरिज का मतलब है- एक ऐसा संबंध जिसमें दोनों पार्टनर आपसी सहमति से शादी के बाहर भी किसी और के साथ रिश्ते में रह सकते हैं. ये रिश्ते केवल शारीरिक नहीं, बल्कि इमोशनल भी हो सकते हैं.
इस व्यवस्था में एक-दूसरे से को पता रहता है और किसी भी तरह की बेवफाई या धोखे की गुंजाइश नहीं होती- क्योंकि सबकुछ आपसी रजामंदी से होता है.
ओपन मैरिज में सबसे जरूरी बात होती है कम्युनिकेशन और ट्रांसपेरेंसी. दोनों पार्टनर एक-दूसरे को अपने बाहरी रिश्तों के बारे में जानकारी देते हैं. इसमें कोई छिपाव नहीं होता और ये मान लिया जाता है कि पार्टनर को दूसरे व्यक्ति से संबंध बनाने में कोई आपत्ति नहीं है.
हालांकि, ये व्यवस्था सभी के लिए सहज नहीं होती और इसके लिए बहुत ज्यादा विश्वास जरूरी होता है.
इस विषय पर समाज में राय बंटी हुई है. कुछ लोगों का मानना है कि जब दोनों पार्टनर आपसी सहमति से किसी तीसरे व्यक्ति से रिश्ता बनाते हैं, तो इसमें धोखा नहीं होता- इसलिए ये ज्यादा ईमानदार रिश्ता है. उनके लिए ये एक ईमानदारी का प्रतीक है.
वहीं, कई लोग इसे रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक ढांचे के खिलाफ मानते हैं. उनका तर्क है कि ऐसे रिश्ते सिर्फ दो नहीं, बल्कि कई लोगों की जिंदगी पर असर डालते हैं.
हालांकि भारत में अब धीरे-धीरे रिश्तों को लेकर खुलापन आ रहा है, लेकिन ओपन मैरिज अभी भी एक ृृ विवादित विचार है. समाज का बड़ा हिस्सा इसे न तो सहजता से स्वीकार करता है और न ही इसे पारंपरिक मूल्यों के अनुकूल मानता है.
ओपन मैरिज एक ऐसा कांसेप्ट है जो पारंपरिक शादी की परिभाषा को चैलेंज कर देता है.