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UNSC अध्यक्ष बनते ही पाकिस्तान की नई चाल, भारत के खिलाफ फिर अलापा कश्मीर राग!

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ दो कड़े कदम उठाए – सिंधु जल समझौता निलंबित किया और ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान व पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया।

👤 Saurabh 02 Jul 2025 05:28 PM

पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता मिलते ही उसने भारत विरोधी रुख अपनाया और कश्मीर मुद्दे को फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर घसीटने की कोशिश की। भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया मोड़ तब आया, जब पाकिस्तान ने शिमला समझौता रद्द करने का ऐलान कर दिया। यह वही ऐतिहासिक समझौता था जो दोनों देशों को आपसी मसलों को सिर्फ बातचीत से सुलझाने के लिए बाध्य करता था। लेकिन हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने न केवल इस समझौते की बुनियाद हिला दी, बल्कि पाकिस्तान की छटपटाहट और रणनीतिक हार को भी उजागर कर दिया।

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने भयानक हमला किया, जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई। इस नापाक हरकत का भारत ने सख्त जवाब दिया। भारत ने दो कड़े कदम उठाए:

सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया- यानी पाकिस्तान को मिलने वाला पानी अब रोका जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया- जिसमें भारत ने पाकिस्तान और POK (पाक अधिकृत कश्मीर) में छिपे आतंकियों पर हमला किया।

इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक तनाव और गोलीबारी चली। जब पाकिस्तान को इस संघर्ष में भारी नुकसान हुआ, तो उसने बौखलाकर एक बड़ा फैसला लिया – पाकिस्तान ने शिमला समझौता रद्द कर दिया।

क्या है शिमला समझौता?

शिमला समझौता 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था, जिसमें यह तय किया गया था कि दोनों देश अपने विवाद आपस में ही बातचीत से सुलझाएंगे, किसी तीसरे देश या मंच को बीच में नहीं लाएंगे।

पाकिस्तान ने क्यों रद्द किया?

पाकिस्तान का कहना है कि अब वह कश्मीर जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। लेकिन असल में पाकिस्तान पहले भी इस समझौते के रहते हुए कई बार कश्मीर की बात संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर उठा चुका है।

अब पाकिस्तान को लगता है कि समझौता खत्म करके वह खुलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ बोल पाएगा।

क्या पाकिस्तान को कोई फायदा होगा?

संभावना बहुत कम है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) पहले से ही कश्मीर मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।

अमेरिका और रूस जैसे बड़े देश, जो यूएन में मजबूत भूमिका निभाते हैं, भारत के करीबी हैं।

भारत बार-बार कहता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इस पर कोई बातचीत नहीं होगी।

भारत का साफ कहना है कि अगर बात होनी है तो सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर (POK) को वापस लेने पर होगी।