मिडिल-ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी संघर्ष के बीच जब अमेरिका की पहल पर सीजफायर की घोषणा हुई, तो लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी। ऐसा लगा कि अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो सकते हैं। लेकिन यह उम्मीद ज्यादा देर टिक नहीं पाई। महज 24 घंटे के अंदर ही हालात फिर से बिगड़ गए और इजराइल की तरफ से हमले शुरू हो गए। इससे साफ हो गया कि क्षेत्र में शांति अभी भी दूर है।
सीजफायर का समर्थन करने के बावजूद इजराइल ने लेबनान पर लगातार कई हमले किए। इस पर अमेरिका की ओर से स्पष्ट किया गया कि लेबनान इस संघर्ष-विराम का हिस्सा नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यह समझौता सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच है, और इसमें लेबनान को शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि न तो अमेरिका और न ही इजराइल ने लेबनान को इस समझौते में शामिल करने पर सहमति दी थी।
इजराइल का मानना है कि लेबनान में हिजबुल्लाह सक्रिय है, जो उसके लिए खतरा बना हुआ है। यही कारण है कि इजराइल लेबनान को इस सीजफायर से अलग मानता है और वहां अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है। हाल ही में इजराइल ने बहुत कम समय में कई हमले किए, जिनमें भारी नुकसान हुआ।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करता है, जिसमें ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्तों के लिए रोकने की बात कही गई है। हालांकि उन्होंने यह भी शर्त रखी कि ईरान को तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना होगा और क्षेत्र में हमले बंद करने होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ किया कि लेबनान में चल रही कार्रवाई इस समझौते का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह को इस सीजफायर में शामिल नहीं किया गया था, इसलिए लेबनान में इजराइल की कार्रवाई अलग मुद्दा है। ट्रंप के अनुसार, यह एक अलग तरह का संघर्ष है, जिसका समाधान अलग तरीके से किया जाएगा।
कुल मिलाकर, मिडिल-ईस्ट में स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। सीजफायर के बावजूद अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष जारी है, जिससे यह साफ है कि स्थायी शांति के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।