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बांग्लादेश में खून-खराबा! एक और नेता के सिर में गोली, हिंदू युवक को जिंदा जलाया – हालात बेकाबू

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. एक और राजनीतिक नेता के सिर में गोली मारी गई, वहीं हिंदू युवक को जिंदा जलाने की घटना ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं.

👤 Samachaar Desk 22 Dec 2025 02:12 PM

पड़ोसी देश बांग्लादेश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. बीते सप्ताह इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद अब नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता मोतालेब शिकदर पर जानलेवा हमला हुआ है. सोमवार सुबह करीब 11:45 बजे खुलना डिविजन में बाइक सवार हमलावरों ने शिकदर के सिर को निशाना बनाकर गोली चलाई. गंभीर हालत में उन्हें तुरंत खुलना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया.

डॉक्टरों का दावा: हत्या की मंशा से चली थी गोली

स्थानीय मीडिया ‘डेली स्टार’ के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि हमलावरों का इरादा शिकदर को मारने का था. हालांकि किस्मत से गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई, जिससे वह घायल तो हुए, लेकिन फिलहाल खतरे से बाहर हैं. पुलिस थाना प्रभारी अनिमेश मंडल ने भी पुष्टि की कि घायल नेता को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था और उनकी हालत अब स्थिर है.

शरीफ उस्मान हादी की हत्या से भड़की हिंसा

इस हमले से पहले ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पालटन इलाके में उनके सिर में गोली मारी गई थी. पहले उनका इलाज ढाका मेडिकल कॉलेज में हुआ, फिर सिंगापुर भेजा गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी. हादी की मौत के बाद देशभर में हिंसा और अस्थिरता और बढ़ गई.

भीड़ हिंसा का कहर, हिंदू युवक को जिंदा जलाया

राजनीतिक हिंसा के साथ-साथ सांप्रदायिक घटनाएं भी सामने आ रही हैं. मयमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ ने जिंदा जला दिया. आरोप था कि उसने धार्मिक भावनाएं आहत की हैं. इस दिल दहला देने वाली घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

दीपू चंद्र दास की हत्या पर भारत ने सख्त ऐतराज जताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है. वहीं बांग्लादेश पुलिस ने सफाई दी कि सूचना देर से मिलने के कारण युवक को बचाया नहीं जा सका.

शेख हसीना के बाद और बिगड़े हालात

विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 में शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद हालात लगातार खराब हुए हैं. मौजूदा सरकार पर कट्टरपंथी तत्वों को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं. राजनीतिक हत्याएं, भीड़ हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमले बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.