डोनाल्ड ट्रंप की संभावित वापसी को लेकर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों, के बीच चिंता बढ़ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने शीतकालीन अवकाश से पहले लौट आएं। अमेरिका के विभिन्न संस्थानों ने छात्रों को संभावित यात्रा प्रतिबंधों और प्रवेश बिंदुओं पर बढ़ती जांच से बचने के लिए यह कदम उठाने को कहा है। 20 जनवरी को ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने की संभावना को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह परामर्श ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान की गई उनकी उस धमकी को ध्यान में रखते हुए जारी किया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी इतिहास में अवैध प्रवासियों को सबसे बड़े पैमाने पर निर्वासित करने की बात कही थी। हालांकि, वैध वीजा रखने वाले भारतीय छात्रों पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालयों का मानना है कि छात्रों को अनावश्यक जोखिम नहीं लेना चाहिए।
यह चिंता ऐसे समय में उभरी है जब पहली बार भारतीय छात्रों का नामांकन चीनी छात्रों से अधिक हो गया है। 2023-24 के बीच अमेरिका की विश्वविद्यालयों में 3.3 लाख भारतीय छात्रों ने दाखिला लिया, जो 2.7 लाख चीनी छात्रों की तुलना में अधिक है।
कुछ संस्थानों ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने शैक्षणिक कैलेंडर में बदलाव किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के सलेम स्थित विलमेट यूनिवर्सिटी में डेटा साइंस के एक पोस्टग्रेजुएट छात्र ने बताया कि जहां कक्षाएं सामान्यतः जनवरी के पहले सप्ताह के बाद शुरू होती थीं, वहीं इस बार 2 जनवरी से शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू हो रहा है। छात्रों को बताया गया है कि जनवरी के पहले सप्ताह के बाद लौटने पर अतिरिक्त जोखिम हो सकता है।
येल यूनिवर्सिटी जैसे कुछ संस्थानों ने छात्रों की शंकाओं के समाधान के लिए विशेष सत्र भी आयोजित किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को यात्रा और सुरक्षा संबंधी संभावित समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक सलाह देना है।
एक माइक्रोबियल पैथोजेनेसिस के छात्र ने कहा कि हवाई अड्डों और उड़ान बुकिंग में किसी भी समस्या से बचने के लिए छात्रों को समय से पहले लौटने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को यात्रा की योजना बनाते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के छात्र एस. सरसन ने बताया कि उन्होंने पहले 10 जनवरी की वापसी की टिकट बुक की थी, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शीतकालीन अवकाश के बाद टिकट महंगे हो गए हैं और उन्हें लगभग 35,000 रुपये खर्च करने पड़े।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों के इस कदम से यह स्पष्ट है कि ट्रंप के सत्ता में लौटने की संभावनाओं ने विदेशी छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने न केवल शैक्षणिक कार्यक्रमों को जल्दी शुरू किया है बल्कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास भी किए हैं। इस स्थिति में छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं को सावधानीपूर्वक बनाएं और निर्धारित समय से पहले अमेरिका लौटने का प्रयास करें।