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Union Budget 2026-27 : टैक्स में बड़े बदलाव की उम्मीद कम, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा जोर

Union Budget 2026-27 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी, जो उनका लगातार नौवां बजट होगा।

👤 Saurabh 01 Feb 2026 12:19 AM

Union Budget 2026-27 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा और एक खास बात यह भी है कि यह बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा।

इस बजट से सरकार की कोशिश होगी कि देश की आर्थिक विकास की रफ्तार बनी रहे, वित्तीय घाटा नियंत्रण में रहे और वैश्विक चुनौतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।

वैश्विक हालात और घरेलू चुनौतियां

इस बजट का समय काफी चुनौतीपूर्ण है। एक ओर देश के भीतर मांग बनी हुई है और महंगाई दर में कुछ कमी आई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसे हालात, कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और अमेरिका जैसे देशों की व्यापार नीतियों से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अब तक संभली हुई है। इसकी वजह टैक्स में पहले किए गए सुधार, जीएसटी में बदलाव, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती मानी जा रही है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस रफ्तार को बनाए रखने की है।

टैक्स मोर्चे पर स्थिरता की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में टैक्स को लेकर कोई बड़ा ऐलान होने की संभावना कम है। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह टैक्स नीति में स्थिरता और भरोसा बनाए रखना चाहती है। व्यक्तिगत आयकर में अगर कोई बदलाव होता भी है, तो वह सीमित और मध्यम वर्ग को राहत देने वाला हो सकता है।

कॉरपोरेट टैक्स दरों में भी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। सरकार का फोकस टैक्स दायरा बढ़ाने, डिजिटल माध्यम से निगरानी मजबूत करने और टैक्स चोरी रोकने पर रहेगा।

पेट्रोल-डीजल से बढ़ सकती है आय

कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर राजस्व बढ़ा सकती है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का बोझ आम जनता पर नहीं डाला जाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में आई गिरावट के कारण बनी गुंजाइश में इसे समायोजित किया जा सकता है।

कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च बना रहेगा आधार

बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च सरकार की प्राथमिकता बना रहेगा। पिछले कुछ वर्षों में सड़कों, रेलवे, रक्षा उत्पादन, शहरी विकास और लॉजिस्टिक्स पर भारी निवेश किया गया है। इसका मकसद निजी निवेश को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सरकार का पूंजीगत खर्च 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी ज्यादा होगा। रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, बिजली और शहरी परिवहन क्षेत्रों को खास प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।

रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और MSME पर फोकस

रोजगार सृजन इस बजट का एक अहम मुद्दा रहेगा। सरकार श्रम आधारित उद्योगों, स्किल डेवलपमेंट और अप्रेंटिसशिप योजनाओं को बढ़ावा दे सकती है। माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए कर्ज गारंटी, सब्सिडी और अन्य सहायता योजनाओं को मजबूत किया जा सकता है।

इसके साथ ही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम में भी कुछ सुधार किए जा सकते हैं, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और नौकरियों में बढ़ोतरी हो सके।

ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा सुरक्षा

सरकार का ध्यान हरित ऊर्जा पर भी बना रहेगा। बजट में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए नए प्रावधान हो सकते हैं। साथ ही, तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रणनीतिक भंडारण पर भी खर्च जारी रहने की संभावना है।

राजनीतिक संतुलन भी जरूरी

हालांकि 2026-27 कोई आम चुनाव का साल नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में बजट में इन राज्यों के लिए कुछ विशेष योजनाएं या मौजूदा योजनाओं का नया स्वरूप देखने को मिल सकता है।