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100 साल पूरे होने के बाद RSS का बड़ा बदलाव… जानिए कैसे बदल रहा है प्रचारक ढांचा

RSS 2026 Restructure: RSS ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक होंगे और क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक. यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में नई व्यवस्था लागू होगी. इससे संगठन का समन्वय बेहतर होगा और जमीनी स्तर तक निगरानी मजबूत होगी.

👤 Samachaar Desk 29 Dec 2025 11:48 AM

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने संगठन में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. 100 साल पूरे होने के बाद संघ अब अपनी कार्यप्रणाली को और आसान, असरदार और जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है. इसके तहत अब प्रांत प्रचारक की व्यवस्था खत्म होगी और उनकी जगह संभाग प्रचारक को जिम्मेदारी दी जाएगी.

प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक

पहले प्रांत प्रचारक का क्षेत्र बहुत बड़ा होता था. इससे कई बार जमीनी स्तर तक काम देखना और निगरानी करना मुश्किल हो जाता था. नई योजना के अनुसार, दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा, और उसके लिए संभाग प्रचारक जिम्मेदार होंगे. इससे क्षेत्र का आकार छोटा होगा और काम आसान तरीके से संभाला जा सकेगा. संघ के वरिष्ठ प्रचारकों के अनुसार यह बदलाव 2026-27 से लागू हो सकता है. इससे संगठन के कामकाज में बेहतर समन्वय और सटीक निगरानी संभव होगी.

क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक

अब संघ ने क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था भी खत्म कर दी है. उनकी जगह हर राज्य में एक राज्य प्रचारक होंगे. पहले एक क्षेत्र प्रचारक कई प्रांतों का काम संभालता था, जिससे जिम्मेदारी बहुत बड़ी हो जाती थी. अब राज्य प्रचारक सीधे पूरे राज्य का काम देखेंगे, जिससे समन्वय और निगरानी आसान और असरदार होगी.

यूपी और उत्तराखंड में बदलाव

उत्तर प्रदेश में पहले दो क्षेत्र प्रचारक होते थे:

  • पूर्वी यूपी: अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत.
  • पश्चिमी यूपी: मेरठ, ब्रज और उत्तराखंड प्रांत.

नई व्यवस्था में अब यूपी के लिए एक राज्य प्रचारक होगा और उत्तराखंड के लिए अलग राज्य प्रचारक. इससे पूरे राज्य का समन्वय आसान होगा और संगठन के कामकाज पर निगरानी बेहतर होगी.

राजस्थान का उत्तर क्षेत्र में शामिल होना

राजस्थान अब तक अलग प्रांत के रूप में काम करता था. नई योजना के तहत इसे उत्तर क्षेत्र में जोड़ने की तैयारी है.

  • पहले उत्तर क्षेत्र में थे: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर.
  • राजस्थान जुड़ने से यह क्षेत्र और व्यापक होगा और सभी राज्यों का समन्वय आसान होगा.

इससे संगठन के कामकाज में संतुलन और बेहतर नियंत्रण आएगा.

निगरानी और समन्वय में सुधार

प्रांत की जगह संभाग और राज्य प्रचारक होने से निचले स्तर तक निगरानी और समन्वय और मजबूत होगा.

  • देशभर में 75 संभाग प्रचारक होंगे.
  • पूरे देश में 9 क्षेत्र प्रचारक रहेंगे.

इस नई व्यवस्था से संघ की गतिविधियाँ जमीनी स्तर तक आसान और असरदार होंगी.

RSS का यह बदलाव संगठन की कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है. 100 साल पूरे होने के बाद संघ अब अपने संगठन को नई सदी की जरूरतों के अनुसार ढाल रहा है. प्रांत की जगह संभाग, क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक और राजस्थान को उत्तर क्षेत्र में जोड़ने जैसे बदलाव संघ को ज्यादा लचीला और प्रभावी संगठन बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम साबित होंगे.

इस बदलाव से संघ को न केवल अंदरूनी समन्वय और निगरानी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि नए प्रचारक प्रणाली से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी और जवाबदेही भी बढ़ेगी. छोटे संभाग और राज्य स्तर के प्रचारक क्षेत्र का अधिक ध्यान रख पाएंगे, जिससे प्रशिक्षण, कार्यक्रम और समाज सेवा गतिविधियाँ और प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकेंगी. यह कदम संघ की रणनीति को भविष्य में और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.