जम्मू और कश्मीर में हाल के दिनों में देखी गई ड्रोन गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। इस बारे में बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि सीमा क्षेत्र में नजर आ रहे ड्रोन छोटे और रक्षात्मक प्रकृति के लगते हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा हो सकता है।
सेना प्रमुख ने साफ कहा कि ऐसे ड्रोन आमतौर पर हथियार ले जाने के बजाय निगरानी और जानकारी इकट्ठा करने के मकसद से उड़ाए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सेना प्रमुख की चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद राजौरी सेक्टर के डुंगाला-नाबला इलाके के पास कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए। इन ड्रोन को सीमा पार से उड़ते हुए भारतीय क्षेत्र की ओर आते देखा गया, जिससे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
स्थानीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, ड्रोन की गतिविधि देर रात देखी गई, जब जवान नियमित निगरानी कर रहे थे। ड्रोन की संख्या एक से अधिक बताई जा रही है।
ड्रोन दिखाई देने के तुरंत बाद भारतीय सेना के जवानों ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत कार्रवाई की। जवानों ने ड्रोन की दिशा में गोलीबारी की, ताकि उन्हें भारतीय सीमा के अंदर आगे बढ़ने से रोका जा सके।
सेना अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सुरक्षा नियमों के अनुसार की गई और इसका मकसद संभावित खतरे को समय रहते टालना था। फिलहाल किसी तरह के नुकसान या ड्रोन के गिराए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ड्रोन घटनाओं के बाद जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है और निगरानी उपकरणों की मदद से इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन की उड़ान के पैटर्न और उनके संभावित मकसद की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध वस्तु या ड्रोन जैसी गतिविधि दिखे, तो तुरंत प्रशासन या सेना को सूचना दें। सेना ने दोहराया कि देश की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी खतरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर स्थिति से सख्ती से निपटा जाएगा।