राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के लिए खुशखबरी है. बहुप्रतीक्षित दिल्ली-मेरठ नमो भारत आरआरटीएस कॉरीडोर अब पूरी तरह से यात्रियों के लिए खोलने की तैयारी में है. अभी तक इस परियोजना का 55 किलोमीटर हिस्सा ही संचालित हो रहा है, लेकिन जल्द ही बचा हुआ 27 किलोमीटर हिस्सा भी आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा. इसके बाद पूरा 82 किलोमीटर कॉरीडोर चालू हो जाएगा.
फिलहाल यात्रियों के लिए यह सेवा दिल्ली के अशोक नगर से मेरठ साउथ स्टेशन तक उपलब्ध है. यहां से हर महीने लगभग 60 हजार यात्री सफर कर रहे हैं. एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने बताया कि जून में पूरे कॉरीडोर का सफल ट्रायल किया जा चुका है और अब उद्घाटन की तैयारी अंतिम चरण में है.
इस कॉरीडोर में चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है. यानी दिल्ली से मेरठ की दूरी, जिसे पहले घंटों में तय करना पड़ता था, अब 1 घंटे से भी कम में पूरी की जा सकेगी. अनुमान है कि इस कॉरीडोर के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद सड़कों से 1 लाख से ज्यादा कारें हट जाएंगी, जिससे ट्रैफिक जाम में भी भारी कमी आएगी.
नमो भारत कॉरीडोर को तैयार करने में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है. यह परियोजना सिर्फ मेरठ ही नहीं बल्कि आसपास के शहरों को भी दिल्ली से जोड़ने का काम करेगी. सरकार की योजना यहीं तक सीमित नहीं है. आने वाले समय में दिल्ली-अलवर कॉरीडोर और दिल्ली-पानीपत कॉरीडोर को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है. दिल्ली-अलवर कॉरीडोर 106 किलोमीटर तक फैला होगा, जो गुरुग्राम होते हुए आगे जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे एनसीआर में जब 8 आरआरटीएस कॉरीडोर बन जाएंगे तो यात्रा और भी सुविधाजनक हो जाएगी. इससे लोगों का समय और ऊर्जा दोनों बचेंगे, साथ ही प्रदूषण और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं में भी बड़ी राहत मिलेगी.