भारत में एक बार फिर कोविड-19 मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा है कि संस्था पूरे देश में मामलों की निगरानी इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के जरिए कर रही है.
डॉ. बहल के अनुसार ICMR कोविड के तीन मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रहा है:
1. वायरस कितना तेजी से फैल रहा है – यह देखा जा रहा है कि संक्रमण दर कितनी बढ़ रही है.
2. क्या यह वायरस मौजूदा इम्यूनिटी से बच निकलता है – चाहे वो वैक्सीन से बनी हो या प्राकृतिक.
3. गंभीर बीमारी कितने लोगों में हो रही है – खासकर उन लोगों में जिनको कोई गंभीर बीमारी नहीं है.
हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि अधिकांश मामले अभी भी हल्के लक्षण वाले हैं.
ICMR प्रमुख के मुताबिक, पहले मामले दक्षिण भारत में बढ़े, फिर पश्चिम भारत और अब उत्तर भारत में भी वृद्धि देखी जा रही है. देशभर में IDSP के जरिए हर राज्य में केस ट्रैक किए जा रहे हैं.
INSACOG के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोविड के दो नए वैरिएंट सामने आए हैं – NB.1.8.1 और LF.7. WHO ने इन्हें अभी "Variants Under Monitoring" श्रेणी में रखा है, न कि "Variants of Concern" में. हालांकि, ये वैरिएंट चीन और एशिया के कुछ हिस्सों में मामलों में वृद्धि का कारण बन रहे हैं.
दिल्ली सरकार के अनुसार, सोमवार को 104 एक्टिव केस दर्ज किए गए. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि नए वैरिएंट से संक्रमित लोगों में अब तक केवल वायरल बुखार जैसे लक्षण देखे गए हैं, और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार ने सभी अस्पतालों को एक स्वास्थ्य सलाह जारी की है ताकि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें.
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बताया कि राज्य में अभी 47 एक्टिव केस हैं और सभी मरीज होम आइसोलेशन में हैं. किसी को वेंटिलेटर या ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है. फिर भी उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने यह भी बताया कि सोमवार से सभी जिला और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को RT-PCR टेस्टिंग किट्स उपलब्ध कराई जा रही हैं.