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राजपाल यादव को हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, खुद को सरेंडर करने का दिया आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की चेक बाउंस मामले में सरेंडर के लिए समय देने की याचिका खारिज कर दी; उन्हें शाम 4 बजे जेल में आत्मसमर्पण करना होगा.

👤 Samachaar Desk 04 Feb 2026 05:02 PM

Rajpal Yadav: बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा. अदालत ने उनके द्वारा चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने साफ किया कि उन्हें शाम 4 बजे संबंधित जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर करना होगा. जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच ने कहा कि पहले ही दो दिन की मोहलत दी जा चुकी है और अब कोई और राहत नहीं दी जा सकती. मामले की पृष्ठभूमि में, मई 2024 में निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह-छह महीने की सजा सुनाई थी.

अदालत ने नरमी दिखाने से इनकार किया

राहत पाने की अंतिम कोशिश के तहत राजपाल यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और सरेंडर करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा. उन्होंने बताया कि वह पैसे का इंतजाम कर रहे हैं और अब तक 50 लाख रुपए जुटा लिए हैं.

लेकिन जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने याचिका खारिज करते हुए कहा, 'आपको पहले ही दो दिन का समय दिया गया था. अब नरमी दिखाने का कोई आधार नहीं है. आज शाम 4 बजे आपको सरेंडर करना होगा.'

हाई कोर्ट ने आलोचना की

इससे पहले 2 फरवरी को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार की कड़ी आलोचना की थी. अदालत ने कहा कि कई बार उन्हें समय और अवसर दिए जाने के बावजूद उन्होंने शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स को भुगतान नहीं किया.

अदालत ने यह भी बताया कि राजपाल यादव ने जून 2024 से लगातार भुगतान के लिए समय मांगा, लेकिन अपनी वादों को पूरा नहीं किया. कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था, जिसमें 40 लाख और 2.10 करोड़ रुपए अलग-अलग किश्तों में शामिल थे, लेकिन तय समयसीमा में पैसे जमा नहीं हुए.

मामला और पिछली सुनवाई

इससे पहले राजपाल यादव ने चेक बाउंस के तहत मिली सजा को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने 28 जून 2024 को यह कहकर सजा पर रोक लगाई थी कि यादव दंपति आदतन अपराधी नहीं हैं और वे समझौते की संभावना तलाशना चाहते हैं. इसके बाद मामला मध्यस्थता के लिए भेजा गया.

राजपाल यादव को ये सजा मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर केस के कारण मिली. आरोप था कि साल 2010 में फिल्म अता पता लापता के प्रोडक्शन के लिए 5 करोड़ रुपए का लोन लिया गया और 8 करोड़ रुपए चुकाने का वादा किया गया था, जिसे उन्होंने पूरा नहीं किया.