Logo

Mauni Amavasya: माघ मेले का सबसे बड़ा दिन! मौनी अमावस्या पर जरूर करें ये काम, जानें क्या है इसका महत्व

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है. इस दिन गंगा स्नान, मौन व्रत और दान-पुण्य करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान होता है.

👤 Samachaar Desk 03 Jan 2026 01:24 PM

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास की मौनी अमावस्या इसे और भी पवित्र बनाती है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, मौन व्रत और दान-पुण्य से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं. विशेष रूप से प्रयागराज में माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान इसी दिन आयोजित होता है. साल 2026 में मौनी अमावस्या को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति रही, लेकिन पंचांग के अनुसार सही तारीख और शुभ मुहूर्त निश्चित किए जा चुके हैं.

मौनी अमावस्या 2026 की सही तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दोपहर 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी 2026 (सोमवार) दोपहर 1:21 बजे तक रहेगी. ऐसे में यह दिन मौनी अमावस्या 2026 के रूप में मनाया जाएगा.

इस दिन भक्त मौन व्रत रखते हैं, गंगा जल में स्नान करते हैं और दान-पुण्य का विशेष महत्व निभाते हैं. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में इस दिन माघ मेले का प्रमुख स्नान सबसे अधिक पुण्यदायी माना जाता है.

शुभ योग और मुहूर्त

2026 की मौनी अमावस्या कई विशेष योगों से संपन्न है. सर्वार्थ सिद्धि योग 18 जनवरी सुबह 10:14 बजे से 19 जनवरी सुबह 7:14 बजे तक रहेगा. इस योग में किए गए कार्य अत्यंत सफल माने जाते हैं. इसके अलावा हर्षण योग और वज्र योग भी बन रहे हैं, जो स्नान और दान को कई गुना पुण्यदायी बनाते हैं.

  • स्नान का सबसे शुभ समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:53 बजे तक
  • राहुकाल: शाम 4:29 से 5:49 बजे तक (इस समय कोई शुभ कार्य न करें)

सूर्य मकर राशि में और चंद्र धनु से मकर में गोचर करेंगे. इस समय किए गए स्नान और दान के फल अनेक गुना बढ़ जाते हैं.

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व

मौनी अमावस्या पर गंगा जल अमृत तुल्य हो जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से अनजाने पाप नष्ट होते हैं और पुण्य प्राप्त होता है. पुराणों के अनुसार, राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को गंगा स्नान से मोक्ष प्राप्त हुआ था.

मौन व्रत रखने से मन शांत होता है और आत्मचिंतन का अवसर मिलता है. यह दिन पूरी तरह भक्ति और ध्यान में बिताने का है, जिससे ईश्वर की कृपा शीघ्र मिलती है. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करने का विशेष महत्व है, लेकिन घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान भी पुण्यदायी माना जाता है.

स्नान और दान के नियम

मौनी अमावस्या पर स्नान और दान में कुछ विशेष नियम अपनाने से पुण्य और भी बढ़ जाता है:

  • स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में करें.
  • दान: गरम कपड़े, कंबल, तिल, गुड़, चावल, गेहूं, फल या काले तिल जरूरतमंद या ब्राह्मण को दें.
  • भक्ति और व्रत: मौन रहकर पूजा करें.
  • खान-पान और व्यवहार: तामसिक भोजन, क्रोध और झूठ से दूर रहें.
  • पूजा: स्नान के बाद विष्णु या शिव पूजा करें.

इन नियमों को अपनाने से न केवल मौनी अमावस्या का पुण्य बढ़ता है, बल्कि पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है.

मौनी अमावस्या 2026 में जीवन में लाभ

मौनी अमावस्या 2026 के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मौन व्रत से जीवन में शांति, समृद्धि और पापों का नाश होता है. पंचांग अनुसार 18 जनवरी रविवार को यह दिन विशेष रूप से शुभ है. इस दिन प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान और पूजा करना अत्यंत फलदायी होगा.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया दान, स्नान और मौन व्रत जीवन में न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक सुख-शांति भी बढ़ाता है.

इसलिए 2026 में मौनी अमावस्या पर इस दिन का पूर्ण लाभ उठाना चाहिए और स्नान-दान-व्रत अवश्य करें.