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रंधावा केस पर पंजाब में बवाल! BJP का CM हाउस घेराव, सुनील जाखड़ का बड़ा आरोप… सरकार की नीयत पर उठे सवाल

Punjab Randhawa case: रंधावा केस को लेकर पंजाब में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

👤 Isha Gupta 22 Mar 2026 01:47 PM

पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला मैनेजर डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा की मौत के मामले ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने चंडीगढ़ स्थित अपने मुख्य कार्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की भी तैयारी कर ली है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी तनाव और बढ़ने के आसार हैं।

सुनील जाखड़ का सरकार पर सीधा हमला

पंजाब भाजपा के प्रधान सुनील जाखड़ ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ कार्रवाई केवल विपक्ष के दबाव में की गई है। जाखड़ का दावा है कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो घटना के तुरंत बाद ही केस दर्ज कर लिया जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों की गई और इसे देर रात क्यों दर्ज किया गया।

विपक्षी एकजुटता ने बढ़ाया दबाव

इस मामले की खास बात यह रही कि अलग-अलग विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार के खिलाफ खड़े नजर आए। जाखड़ के अनुसार, यही दबाव था जिसके कारण प्रशासन को कदम उठाने पड़े।

उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाएगा।

परिवार को लेकर भी गंभीर आरोप

जाखड़ ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता जरूरी होती है, लेकिन यहां हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना

जाखड़ ने भगवंत मान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहे, लेकिन पीड़ित परिवार से मिलने का समय नहीं निकाल पाए। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने वाला बताया। भाजपा ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

यह मामला अब सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है।