पंजाब सरकार स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुरानी स्कूल वाहन नीति में बदलाव करने की तैयारी में है। अब स्कूल वाहन हादसे की स्थिति में केवल स्कूल के प्रिंसिपल ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन समिति को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
नई नीति के तहत, अगर वाहन बच्चों के माता-पिता ने भी बुक किया हो, तो भी स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार माना जाएगा। इसके अलावा, स्कूल छुट्टी के समय ट्रैफिक को वन वे करने का भी प्रस्ताव रखा गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके।
हाल ही में पटियाला-समाना रोड पर एक इनोवा कार और टिप्पर के बीच हादसे में 7 बच्चों की मौत हो गई। यह कार बच्चों के माता-पिता ने खुद बुक की थी। जांच में पता चला कि कार में 7 की जगह 14 बच्चे बैठाए गए थे। वहीं, जिस टिप्पर ने टक्कर मारी, उसका ड्राइवर 19 साल का था और उसके पास न ड्राइविंग लाइसेंस था न परमिट।
इस दर्दनाक घटना के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य सरकार से कहा कि पुरानी नीति में बदलाव होना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
पंजाब के ट्रांसपोर्ट विभाग ने 8 लोगों की एक समिति बना दी है जो 2013 में बनी पुरानी नीति को फिर से देखेंगी और बदलाव सुझाएंगी। इसमें पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट और सड़क सुरक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति एक महीने में सुझाव देगी।
2013 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ ने मिलकर सुरक्षित स्कूल वाहन नीति बनाई थी। बाद में 2015 में कोर्ट ने बाल अधिकार आयोग को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी थी।
बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष कंवरदीप सिंह ने कहा कि पुरानी नीति में बदलाव जरूरी है, क्योंकि वाहन स्कूल का हो या अभिभावकों ने बुक किया हो, बच्चों की जान की जिम्मेदारी स्कूल की ही होनी चाहिए। वाहन की फिटनेस, ओवरलोडिंग और चालक की योग्यता पर नजर रखना स्कूल की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आयोग ने अनफिट टिप्पर और बिना लाइसेंस के चलने वाले ड्राइवरों पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। जो वाहन क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाकर दौड़ते हैं, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
ट्रांसपोर्ट विभाग के अफसरों के मुताबिक, नई सुरक्षित स्कूल वाहन नीति पर काम शुरू हो गया है। जल्द ही इसका ऐलान होगा ताकि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।