पंजाब में भगवंत मान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आर-पार की लड़ाई छेड़ी है, उसका असर अब वर्दीधारियों तक साफ़ दिखने लगा है. ताजा मामला फाजिल्का जिले से है, जहां पुलिस महकमे की ईंट से ईंट बज चुकी है. चार थाना स्टाफ के बाद अब सीधे SSP की गर्दन भी भ्रष्टाचार की तलवार के नीचे आ गई है.
सूत्रों की मानें तो फाजिल्का के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) वरिंदर सिंह बराड़ को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है. वजह? उन्हीं की नाक के नीचे चार पुलिसकर्मी एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे और वो भी किसी गैंगस्टर या माफिया से नहीं, बल्कि एक नाबालिग से ज़ब्त किए गए मोबाइल फोन के मामले में. जी हां, ज़रा सोचिए... एक मासूम की जेब से निकाले मोबाइल के एवज़ में 'रिटर्न गिफ्ट' की डिमांड थी पूरी एक लाख की!
विजिलेंस टीम ने जैसे ही जाल बिछाया, चारों वर्दीवाले बिना किसी हिचक के फंस गए. अब सवाल उठा - "इनकी हिम्मत इतनी कैसे हुई?" जवाब मिला - 'क्योंकि ऊपर से संरक्षण था. फिर क्या था, सरकार ने SSP वरिंदर सिंह बराड़ पर कार्रवाई करते हुए तुरंत सस्पेंशन ऑर्डर जारी कर दिए.
सरकार का संदेश साफ है – चाहे कांस्टेबल हो या कप्तान, अब कोई नहीं बचेगा. भगवंत मान खुद कई बार कह चुके हैं कि “भ्रष्टाचारियों को न जेल से छूट मिलेगी, न कुर्सी से. यह कार्रवाई सिर्फ एक पुलिस अधिकारी पर नहीं, पूरे सिस्टम को आईना दिखाने वाली है. अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में और कौन-कौन सी गर्दनें भ्रष्टाचार के फंदे में फंसती हैं.