मिडिल ईस्ट में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया में गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच Vladimir Putin के एक बयान ने यूरोप के कई देशों को परेशान कर दिया है। रूस के राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर रूस यूरोप को गैस की सप्लाई रोक सकता है। इस बयान के बाद यूरोपीय बाजारों में गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई और कीमतें अचानक काफी ऊपर चली गईं।
हाल ही में Vladimir Putin ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए रूस को यूरोप को गैस भेजने पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
राजनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि ये बयान सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक संकेत हो सकता है। उनका कहना है कि यूरोप लगातार रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। वहीं रूस का दावा है कि अब उसके पास गैस बेचने के लिए एशिया जैसे नए बाजार मौजूद हैं। ऐसे समय में यह बयान यूरोप पर दबाव बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोप में गैस की कीमतें बढ़ने की एक वजह Strait of Hormuz के आसपास बढ़ा तनाव भी है। यह दुनिया का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से ग्लोबल लेवल पर बड़ी मात्रा में तेल और एलएनजी का व्यापार होता है।
युद्ध जैसे हालात के कारण कतर ने कुछ समय के लिए अपनी एलएनजी सप्लाई रोक दी है। इससे यूरोप के ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ा है। कतर यूरोपीय संघ की गैस जरूरतों का एक हिस्सा पूरा करता है, इसलिए सप्लाई रुकने से बाजार में घबराहट बढ़ गई। इसी कारण गैस की कीमतें अचानक तेजी से बढ़ गईं और ऊर्जा कंपनियों को स्थिति की समीक्षा के लिए आपात बैठकें करनी पड़ीं।
जब से Russia–Ukraine War शुरू हुआ है, तब से यूरोप ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने की कोशिश की है। इस दौरान Norway और United States यूरोप के बड़े ऊर्जा सप्लायर बनकर उभरे हैं।
इसके बावजूद कई यूरोपीय देश अब भी रूस से एलएनजी खरीदते हैं। France, Spain और Belgium जैसे देशों में अभी भी रूस से गैस आयात होता है। इसी वजह से पूरी तरह से रूसी गैस से दूरी बनाना यूरोप के लिए आसान नहीं है। European Union ने 2026 में एक कानून पास किया है, जिसका उद्देश्य 2027 के अंत तक रूसी गैस पर पूरी तरह रोक लगाना है।
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव किया है। उसने गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा एशिया की ओर मोड़ दिया है, जिसमें China और India जैसे देश शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समय रूस यूरोप को गैस सप्लाई बंद कर देता है, तो यूरोप के सामने ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनाव होने के कारण ऊर्जा के विकल्प सीमित हो गए हैं। ऐसी स्थिति में सप्लाई रुकने का असर यूरोप की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर साफ दिखाई दे सकता है।