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ईरान में हालात बेकाबू! इंटरनेट बंद, 65+ मौतें, ट्रंप पर खामेनेई का सीधा हमला

Iran protests 2026: ईरान में महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन बन चुके हैं. हालात काबू से बाहर होते देख सरकार ने इंटरनेट और फोन कॉल पर रोक लगा दी है. अब तक 65 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है.

👤 Ashwani Kumar 10 Jan 2026 11:45 AM

ईरान इस वक्त गंभीर संकट से गुजर रहा है. देश के कई शहरों में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन चल रहे हैं. इन प्रदर्शनों की वजह से आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सरकार को इंटरनेट और मोबाइल कॉल तक बंद करने का फैसला लेना पड़ा.

कैसे शुरू हुए ये प्रदर्शन?

इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को राजधानी तेहरान के दो बाजारों से हुई थी. शुरुआत में लोग बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमत से परेशान थे. रोजमर्रा की चीजें इतनी महंगी हो गईं कि आम आदमी का गुजारा मुश्किल होने लगा.

धीरे-धीरे ये गुस्सा पूरे देश में फैल गया और अब यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार और उसके फैसलों के खिलाफ खुला विरोध बन चुका है.

कितने शहरों तक फैल चुका है आंदोलन?

मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रदर्शन अब ईरान के 31 प्रांतों के करीब 180 शहरों तक पहुंच चुके हैं. अब तक 65 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है. हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया पहले इन आंकड़ों को लेकर चुप थी, लेकिन बाद में उसने माना कि प्रदर्शन के दौरान लोग मारे गए हैं.

इंटरनेट और कॉल पर क्यों लगा बैन?

सरकार ने हालात काबू में रखने के लिए इंटरनेट और टेलीफोन कॉल पर रोक लगा दी है. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लिया गया है.

लेकिन आम जनता का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से उनकी आवाज दबाई जा रही है. सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स बंद होने से लोग न तो सही जानकारी पा पा रहे हैं और न ही अपने परिवार से ठीक से संपर्क कर पा रहे हैं.

खामेनेई का ट्रंप पर बड़ा हमला

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है. खामेनेई ने ट्रंप को “अहंकारी” बताते हुए कहा कि उनके हाथ ईरानी जनता के खून से सने हैं.

वहीं, सरकारी मीडिया का दावा है कि अमेरिका और इज़रायल के एजेंट हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह गुस्सा देश की अंदरूनी समस्याओं का नतीजा है.

फ्लाइट्स पर भी पड़ा असर

ईरान में बढ़ती अशांति का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिख रहा है. दुबई एयरपोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं. इसके अलावा, तुर्की एयरलाइंस ने भी ईरान के ऊपर से गुजरने वाली कई उड़ानों को कैंसिल कर दिया है.

आगे क्या होगा?

ईरान में हालात तेजी से बदल रहे हैं. जनता का गुस्सा, सरकार की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय दबाव मिलकर स्थिति को और तनावपूर्ण बना रहे हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार कोई समाधान निकालती है या फिर ये विरोध प्रदर्शन और तेज हो जाते हैं.

फिलहाल, ईरान के लोग अनिश्चितता और डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं, और पूरी दुनिया की नजर इस संकट पर टिकी हुई है.