मध्य पूर्व में जारी ईरान और इज़राइल के बीच 12 दिनों तक चले खूनी संघर्ष के बाद अब उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच संघर्षविराम लागू हो गया है. यह युद्ध ऐसे समय में थमा है जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मिसाइलों की बारिश कर दी थी और हालात बेहद विस्फोटक हो चुके थे.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा, 'THE CEASEFIRE IS NOW IN EFFECT. PLEASE DO NOT VIOLATE IT.' यानी 'संघर्षविराम अब प्रभाव में है, कृपया इसका उल्लंघन न करें. ट्रंप के इस बयान से पहले ईरान ने इज़राइल पर मिसाइलों की पांच लहरें दागीं, जिनमें दक्षिणी इज़राइल में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि संघर्षविराम एक चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू होगा. यह प्रक्रिया मंगलवार को 0400 GMT से शुरू हुई, जिसके तहत पहले ईरान ने सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति जताई. इसके 12 घंटे बाद इज़राइल को भी युद्धविराम का पालन करना था. इससे पहले, ट्रंप ने दोनों देशों से पूर्ण संघर्षविराम की मांग की थी और कहा था कि अमेरिका की भूमिका सिर्फ मध्यस्थता की है, जिससे यह रक्तपात रोका जा सके.
ईरान की सरकारी मीडिया ने भी पुष्टि की कि इज़राइल पर मिसाइल हमलों के बाद संघर्षविराम प्रभावी हो गया है. हालांकि, SNN (ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी) ने बताया कि संघर्षविराम लागू होने से कुछ ही मिनट पहले ईरान ने अंतिम मिसाइल हमला किया.
इस हमले के बाद इज़राइल की सेना ने भी अपने नागरिकों को राहत की सांस दी. एक बयान में इज़रायली मिलिट्री ने कहा, 'Following a situational assessment, the Home Front Command has announced that the requirement to remain near protected spaces throughout the country has been lifted. यानी अब देशभर में लोगों को शरण स्थलों के पास रहने की आवश्यकता नहीं है.
इस संघर्षविराम से कुछ ही घंटे पहले ईरान ने क़तर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया था. ट्रंप ने इसे "कमज़ोर प्रतिक्रिया" करार दिया और कहा कि यह अमेरिका द्वारा ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हुए वीकेंड हमलों का जवाब था. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इस संघर्षविराम की शर्तों पर इज़राइल ने भी सहमति जताई है, बशर्ते ईरान और कोई हमला न करे.
ईरान की ओर से भी इस संघर्षविराम की पुष्टि कर दी गई है, लेकिन तेहरान ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक इज़राइल अपने हमले बंद नहीं करता, शांति स्थायी नहीं मानी जा सकती. ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि “शत्रुता का अंत तभी संभव है जब इज़राइल अपनी कार्रवाई बंद करे.
यह पूरी जंग 13 जून को शुरू हुई थी, जब इज़राइल ने ईरान पर न्यूक्लियर हथियारों की दिशा में बढ़ने का आरोप लगाते हुए सैन्य हमला किया। अमेरिका ने भी वीकेंड में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले किए. ईरान ने हमेशा यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है.