अमेरिका ने रविवार को ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर बमबारी कर के सीधे इज़राइल के साथ मिलकर इस युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने का एलान किया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी विमानों ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हमले को बेहद सफल बताया. यह कार्रवाई ईरान में 1979 की क्रांति के बाद पहली बड़ी सीधी अमेरिकी हमला थी. उसने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने तुरंत शांति की पहल नहीं की, तो 'भविष्य के हमले और विनाशकारी और तेज होंगे, इस हमले के बाद ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल से जवाबी हमला किया.
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'ईरान के प्रमुख नाभिकीय संकेंद्रण केंद्र पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए हैं' उन्होंने इसे 'भव्य सैन्य सफलता' बताया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान शांति नहीं करेगा, तो "और हमले करेंगे, तेज़ और नापाक. यह विमानन हमले US बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से मंत्रमुग्ध कर देने वाले 30,000 पाउंड GBU‑57 बंकर-बस्टर्स गिरा कर किए गए, वहीं टॉमहॉक मिसाइलों का उपयोग भी हुआ. यह विमानन हमले US बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से मंत्रमुग्ध कर देने वाले 30,000 पाउंड GBU‑57 बंकर-बस्टर्स गिरा कर किए गए, वहीं टॉमहॉक मिसाइलों का उपयोग भी हुआ.
1. Six B‑2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने संयुक्त रूप से फ़र्डो, नाटक्ज़ और इस्फहान को निशाना बनाया.
2. यूएस पनडुब्बियों ने 30 टॉमहॉक मिसाइलों से हमले में योगदान दिया.
3. B‑2 विमानों की उड़ान मिसौरी से शुरू हुई, कुल 40 घंटे से अधिक चलती रही. यह क्षमता और विस्तार शक्ति की मिसाल है.
विशेष ठिकानों का महत्व फ़र्डो: पहाड़ के अंदर 300फुट गहराई में स्थित, GBU‑57 बम के बिना पहुंचना लगभग असंभव था. नाटक्ज़: 50,000 से अधिक सेंट्रीफ्यूज के साथ ‘क्राउन ज्वेल’ के रूप में पहचाना जाता है. इस्फहान: यह वैज्ञानिक और यूरेनियम रूपांतरण केंद्र है, जिसे भारी क्षति पहुंचाई गई.
ईरान ने मिसाइल से इज़राइल पर हमला कर जबाव लौटाया जिसमें 11 लोग घायल हुए. ईरान ने परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की कसम खाई और कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. संयुक्त राष्ट्र और IAEA ने इस सैन्य कदम को 'खतरनाक उछाल' बताया, IAEA ने फर्डो के पास कोई विकिरण लीक नहीं होने की रिपोर्ट दी.
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 'आपके पास शांति का रास्ता है; अगर आप नहीं रास्ता अपनाएंगे तो आग और ज्यादा भीषण होगी.उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि जबरदस्त शक्ति के साथ अमेरिका की रणनीति का मकसद स्थिरता और विराम लाना है- न कि युद्ध का विस्तार.