New Labour Code: दफ्तर में लगातार काम करने वाले कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत यही होती है कि उनकी मेहनत के बदले मिलने वाली अर्न्ड लीव (Earned Leaves) बिना इस्तेमाल हुए ही खत्म हो जाती हैं। लेकिन अब नए लेबर कोड 2025 (ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड-2020) ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल दिया है। यह नया कानून नौकरीपेशा वर्ग के लिए राहत की बड़ी सांस लेकर आया है। अब कर्मचारी हर साल अपनी अतिरिक्त छुट्टियों को नकदी (Encashment) में बदल सकते हैं, पहले जहां इसके लिए नौकरी छोड़ना, रिटायर होना या कंपनी से निकाले जाने तक का इंतजार करना पड़ता था।
नए नियमों के तहत, कर्मचारियों को ‘अर्न लीव’ का हकदार बनने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुराने फैक्ट्रिज एक्ट (1948) में इसके लिए 240 दिन लगातार काम करना अनिवार्य था। अब इसे घटाकर 180 दिन (लगभग छह महीने) कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी ने एक कैलेंडर वर्ष में 180 दिन लगातार काम किया है, तो वह वेतन सहित छुट्टियों का हकदार बन जाएगा। यह नियम पूरे देश में लागू होगा। हालांकि, जिन राज्यों में पहले से बेहतर नियम हैं, वहां कर्मचारी उन नियमों का ही लाभ उठा सकते हैं।
पुरानी व्यवस्था में कई बार कर्मचारी छुट्टी लेने का आवेदन करता, लेकिन कामकाज की वजह से उसे अनुमति नहीं मिलती थी। उस स्थिति में छुट्टी बेकार हो जाती थी। नए लेबर कोड 2025 में यह अन्याय खत्म कर दिया गया है। अब यदि कर्मचारी की छुट्टी नियोक्ता द्वारा खारिज कर दी जाती है, तो वह छुट्टी अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड कर दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कंपनी की किसी भी मजबूरी का खामियाजा कर्मचारी को भुगतना नहीं पड़ेगा।
नए लेबर कोड का सबसे बड़ा फायदा है वार्षिक इनकैशमेंट। कर्मचारी अधिकतम 30 दिन की छुट्टियों को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। यदि कोई कर्मचारी के पास 30 दिन से ज्यादा छुट्टियां जमा हो जाती हैं, तो वह उन अतिरिक्त छुट्टियों को नकद में बदल सकता है। साल के अंत में कर्मचारी अपनी सभी जमा छुट्टियों को भी नकदी में बदलने का दावा कर सकते हैं।
यह लाभ मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए है जो मैनुअल, अकुशल, कुशल, तकनीकी, ऑपरेशनल या क्लर्कियल काम करते हैं और जिनका मासिक वेतन 18,000 रुपये से कम है। यदि कोई सुपरवाइजर, मैनेजर या प्रशासनिक पद पर है और उसका वेतन 18,000 रुपये से अधिक है, तो उसे यह लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही, कई राज्यों ने अभी तक नए लेबर कोड को अधिसूचित नहीं किया है। इसलिए जब तक इसे आपके राज्य में लागू नहीं किया जाता, आपकी कंपनी पुराने नियमों के अनुसार ही काम कर सकती है।