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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का असर भारत पर! गैस सप्लाई पर संकट, सरकार ने जारी की नई प्रायोरिटी लिस्ट

Hormuz Strait closure impact India: ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक गैस सप्लाई पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए भारत सरकार ने नेचुरल गैस वितरण के लिए नई प्राथमिकता सूची जारी की है।

👤 Ashwani Kumar 10 Mar 2026 11:18 AM

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। इस स्थिति का सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है।

घरेलू और जरूरी सेक्टर को मिलेगी पूरी गैस

सरकार ने साफ किया है कि आम लोगों की जरूरतों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। इसलिए घरेलू उपयोग से जुड़े सेक्टरों में गैस की सप्लाई में कोई कटौती नहीं की जाएगी। घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG, वाहनों के लिए CNG और घरेलू LPG सिलेंडर के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस को 100 प्रतिशत सप्लाई दी जाएगी। इसके अलावा गैस पाइपलाइन को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन को भी पूरी सप्लाई मिलेगी।

इंडस्ट्री सेक्टर में होगी गैस कटौती

दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति सीमित की जा सकती है। सरकार ने बताया है कि इंडस्ट्री से जुड़े कई सेक्टरों को उनकी पिछली खपत के आधार पर कम गैस दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस ही मिल पाएगी। वहीं उर्वरक यानी फर्टिलाइजर कंपनियों को करीब 70 प्रतिशत और तेल रिफाइनरीज को लगभग 65 प्रतिशत गैस आवंटित की जाएगी। इससे कुछ उद्योगों पर उत्पादन को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

होटल और कमर्शियल सेक्टर की चिंता बढ़ी

गैस सप्लाई में संभावित कटौती को लेकर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री भी चिंता जता रही है। होटल एसोसिएशन पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होती है तो कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट को कामकाज में मुश्किलें आ सकती हैं।

गैस वितरण में बदलाव क्यों जरूरी पड़ा

सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका बड़ा भाग मिडिल ईस्ट से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतर भी 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

फिलहाल 40 दिनों का गैस स्टॉक मौजूद

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में फिलहाल LPG का लगभग 40 दिनों का स्टॉक मौजूद है, जिससे तुरंत किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। साथ ही सरकार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से वैकल्पिक आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अगर यह वैश्विक संकट लंबा चलता है तो उद्योगों पर इसका असर दिख सकता है, जैसे चाय बागानों में उत्पादन कम होना या उर्वरक कंपनियों के कामकाज में बाधा आना। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।