Happy Rath Yatra 2025: भारत के सबसे पवित्र और भव्य धार्मिक आयोजनों में से एक पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा शुक्रवार से शुभारंभ हो गई। इस अवसर पर ओडिशा के पवित्र नगर पुरी में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां लोग भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दिव्य रथों को खींचने का सौभाग्य पाने के लिए उमंग और श्रद्धा से भरकर आए।
रथ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा दिव्य पर्व है जो सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, भक्ति और आध्यात्मिकता को जीवंत करता है। भक्त मानते हैं कि इस यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
इस साल के आयोजन के लिए पुरी को रंग-बिरंगे झंडों, फूलों और भक्ति संगीत से सजाया गया है। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, बलभद्र का तलध्वज और सुभद्रा का दर्पदलन रथ सजे-धजे, विशाल लकड़ी के पहियों पर श्रद्धालुओं द्वारा 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक खींचे जा रहे हैं। मान्यता है कि यह मंदिर भगवान की मौसी का घर है, जहां वे नौ दिनों के प्रवास पर जाते हैं।
पुरी के कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने बताया कि “हम भव्य रथ यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सभी अनुष्ठानों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की योजना बहुत सावधानी से बनाई गई है, ताकि यह धार्मिक आयोजन पूरी शांति और श्रद्धा के साथ संपन्न हो सके।”
इस विशाल आयोजन के लिए राज्य सरकार ने पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। करीब 10,000 पुलिसकर्मियों, 200 प्लाटून, बीएसएफ, सीआरपीएफ और अन्य बलों की तैनाती की गई है। पहली बार इस साल AI-सक्षम 275 CCTV कैमरों की मदद से पूरे शहर में निगरानी की जा रही है, जिसे एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा गया है।
रथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना को दर्शाता है जिसमें ईश्वर को जन-जन का साथी माना जाता है। इस उत्सव में भाग लेना लोगों के लिए जीवन का एक पावन अवसर है, जो श्रद्धा, सेवा और एकता का प्रतीक बन गया है।