सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूण माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सावन की शिवरात्रि और सोमवार का दिन शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहाँ हम जानेंगे कि सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें।
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस समय प्रकृति हरी-भरी होती है और हरियाली का सौंदर्य चारों ओर बिखरा होता है। सावन के महीने में भगवान शिव को जल चढ़ाने और उनकी विशेष पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
सावन में भगवान शिव की पूजा करने के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
भगवान शिव का ध्यान करें और उन्हें आह्वान करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए पूजा आरंभ करें।
भगवान शिव को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल) से स्नान कराएँ। इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराएँ।
भगवान शिव को तांबे के लोटे में जल और गंगा जल भरकर अर्पित करें। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है।
भगवान शिव को भस्म और चंदन अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाएँ और भस्म से उनका श्रृंगार करें।
भगवान शिव को भांग अर्पित करें और धूप दीप जलाएँ। इससे वातावरण पवित्र होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
रुद्राक्ष माला से ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप करने से मन की शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरण करें। प्रसाद में फल, मिठाई और पंचामृत का वितरण करें।
पूजा के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
बेलपत्र को उल्टा न रखें।
सोमवार के दिन व्रत रखें और भगवान शिव का ध्यान करें।
भगवान शिव को तामसिक भोजन न अर्पित करें।
सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखना अत्यंत फलदायी होता है।
भगवान शिव के मंदिर में जाकर अभिषेक करना चाहिए।
महादेव का ध्यान करते हुए भक्ति और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए।
इस प्रकार, सावन में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। सावन का महीना भक्तों के लिए आनंद और समृद्धि का स्रोत है।.