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होलिका दहन 2026 में चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग! जानिए 3 मार्च की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा विधि

Holika Dahan 2026 Subh Muhurat And Vidhi: 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर होगा। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। शाम 6:22 से 8:50 तक शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा और अग्नि प्रज्वलन किया जाएगा।

👤 Samachaar Desk 28 Feb 2026 11:07 AM

Holika Dahan 2026 Subh Muhurat And Vidhi: हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इसके अगले दिन रंगों की होली मनाई जाती है। साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा का दिन खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। इस कारण लोग जानना चाहते हैं कि होलिका दहन कब और कैसे किया जाए। नीचे आसान शब्दों में तिथि, ग्रहण का समय और होलिका दहन की विधि दी जा रही है।

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी। ये तिथि 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 3 मार्च 2026 को होलिका दहन किया जाएगा।

Chandra Grahan 2026 का समय

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल भी प्रभावी माना जाएगा।

होलिका दहन 2026 का शुभ समय

ग्रहण के समय को ध्यान में रखते हुए 3 मार्च 2026 को शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा। इस समय के भीतर विधि-विधान से पूजा कर अग्नि प्रज्वलित की जा सकती है।

सुबह की तैयारी- होलिका दहन वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और ईश्वर से सुख-शांति की प्रार्थना करें।

स्थान की व्यवस्था- जहां होलिका दहन होना है, उस स्थान को पहले साफ कर लें। वहां लकड़ियां और उपले सजाकर होलिका तैयार करें।

पूजन सामग्री- पूजा के लिए रोली, अक्षत (चावल), फूल, माला, नारियल, कच्चा सूत, हल्दी, गुलाल, गेहूं की बालियां, जौ, चने, गोबर के उपले और जल आदि रख लें।

पूजन विधि- सबसे पहले कच्चा सूत होलिका के चारों ओर लपेटें। फिर रोली और अक्षत अर्पित करें और जल चढ़ाएं। इसके बाद श्रद्धा से अग्नि जलाएं।

परिक्रमा- अग्नि प्रज्वलित होने के बाद परिवार के साथ होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें। इस दौरान मन में बुराइयों के नाश और सुख-समृद्धि की कामना करें।

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग पुराने मनमुटाव भूलकर नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करते हैं और अगले दिन रंगों के साथ खुशियां मनाते हैं।