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Falgun Month Pradosh Vrat 2026: कब है फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत, जानिए सही समय, पूजा विधि से लेकर सबकुछ

Falgun Month Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 2026 में कब और कैसे मनाया जाएगा, इसे लेकर खास समय और विधि है जानिए कौन सा दिन है, कब शुरू होता है और किस पूजा से जुड़े रहस्य जीवन बदल सकते हैं.

👤 Samachaar Desk 18 Feb 2026 04:17 PM

Falgun Month Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में हर महीने की त्रयोदशी तिथि को महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. ये व्रत विशेष रूप से प्रदोष काल में किया जाता है, जब भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का समय सबसे शुभ माना जाता है. प्रदोष व्रत जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति लाने वाला माना जाता है.

प्रदोष व्रत जिस दिन पड़ता है, उसी दिन के अनुसार उसका नाम रखा जाता है. उदाहरण के लिए, यदि यह व्रत रविवार को आता है तो इसे रवि प्रदोष कहा जाता है.

फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 2026

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार शनिवार, 28 फरवरी 2026 से शुरू होकर रविवार, 1 मार्च 2026 को समाप्त होगी.

तिथि प्रारंभ: शनिवार, 28 फरवरी, रात 8:43 बजे तिथि समाप्ति: रविवार, 1 मार्च, शाम 7:09 बजे

चूंकि ये तिथि रविवार को समाप्त हो रही है, इसलिए इस बार का फाल्गुन प्रदोष रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा. इस दिन विशेष रूप से शिवजी की पूजा और रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत रखने का तरीका सरल है, लेकिन विधिपूर्वक करना शुभ होता है:

1. स्नान और स्वच्छता व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.

2. संकल्प और ध्यान पूजा स्थल को साफ करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.

3. पूजा सामग्री अर्पण भगवान शिव और माता पार्वती को जल, बेलपत्र, फूल, फल आदि अर्पित करें। यदि संभव हो तो शिवलिंग पर जल अर्पित करना और मंदिर में पूजा करना शुभ माना जाता है.

4. संध्या पूजा और रुद्राभिषेक शाम के समय प्रदोष काल में शिवजी का रुद्राभिषेक करें. भोलेनाथ को खीर, आलू का हलवा, दही और घी का भोग लगाएं.

5. व्रत कथा और आरती प्रदोष व्रत की कथा पढ़कर आरती करें.

6. व्रत का नियम प्रदोष व्रत को निर्जला या फलाहारी रखा जाता है. पूरे दिन भोजन न करें और शाम की पूजा या अगले दिन व्रत खोलें.

प्रदोष व्रत का महत्व

भगवान शिव सारे संकट दूर करते हैं. व्रत करने वाले पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है. इसके अलावा, जीवन में सुख-शांति और मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति में भी इस व्रत को विशेष स्थान दिया गया है. फाल्गुन माह का प्रदोष व्रत इसलिए न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है.