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Diwali 2024: दिवाली की तारीख हुई कंफर्म देश के विदवानों ने किया एलान

दिवाली 2024 की सही तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंडितों और विद्वानों ने शास्त्रों के अनुसार शुभ दिन बताया है।

👤 Samachaar Desk 29 Oct 2024 10:02 PM

दिवाली का त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है, लेकिन साल 2024 में इसकी तारीख को लेकर पूरे भारत में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, पंचांग और ग्रेगोरियन कैलेंडर में अंतर होने के कारण इस वर्ष दिवाली की सही तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। इस बार दिवाली मनाने के लिए दो तिथियों का उल्लेख हो रहा है – 31 अक्टूबर और 1 नवंबर। लोग इस बात को लेकर उलझन में हैं कि असल में दिवाली किस दिन मनाई जाए।

पंडितों और विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष दिवाली की पूजा 31 अक्टूबर को रात में शुरू होकर 1 नवंबर तक चलेगी, इसलिए दोनों दिन शुभ माने जा सकते हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए है जो पंचांग के अनुसार दिवाली मनाते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, अमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी पूजन करने से विशेष लाभ होता है, इसलिए लोग अपनी सुविधा और मान्यताओं के अनुसार तिथि चुन सकते हैं।

साल 2024 में दिवाली की तारीख को लेकर कंफ्यूजन का कारण पंचांग और ग्रेगोरियन कैलेंडर के बीच का अंतर है। दिवाली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है, लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिनों में पड़ रही है – 31 अक्टूबर की रात से 1 नवंबर तक। ऐसे में लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि पूजा किस दिन करना शुभ रहेगा।

विद्वानों के अनुसार, अमावस्या की रात को लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। पंचांग के मुताबिक, दिवाली की पूजा 31 अक्टूबर की रात शुरू होकर 1 नवंबर को भी चल सकती है, इसलिए दोनों तिथियां शुभ मानी जा सकती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है, और इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इस कारण हर घर में दीप जलाए जाते हैं और लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर 2024, गुरुवार को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 1 नवंबर 2024, शुक्रवार की शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। इसी वजह से लोग दिवाली की पूजा की सही तिथि को लेकर उलझन में हैं। विद्वानों का कहना है कि अमावस्या की रात को पूजा करना शुभ माना जाता है, इसलिए दोनों तिथियों में कोई भी शुभ मानी जा सकती है। भक्त अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा का समय तय कर सकते हैं।