City of Joy

भारत का एक ऐसा भी शहर है जिसे “City of Joy” के नाम से जान जाता है.

नाम का रहस्य

कोलकाता को 'City of Joy' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां के लोग गरीबी में भी खुशी ढूंढना जानते हैं और जीवन का उत्सव मनाते हैं.

किताब ने दिखाई असली कहानी

1985 में फ्रेंच लेखक Dominique Lapierre की किताब 'The City of Joy' ने आनंद नगर की झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों की जिंदगी को दुनिया के सामने रखा.

गरीबों में छुपी खुशी

किताब ने दिखाया कि कैसे रिक्शा चालक, मजदूर और गरीब परिवार मुश्किल हालात में भी एक-दूसरे की मदद करते हैं.

सिनेमा ने बढ़ाई लोकप्रियता

1992 में इसी किताब पर फिल्म बनी जिसमें Patrick Swayze ने मुख्य भूमिका निभाई. फिल्म ने कोलकाता की गरीबी और इंसानियत दोनों को दुनिया के सामने रखा.

त्योहारों की रंगीनता

दुर्गा पूजा, काली पूजा, क्रिसमस-कोलकाता के लोग हर त्योहार को खुशी से मनाते हैं, यही शहर की असली ऊर्जा है.

साहित्य और कला का केंद्र

रवींद्रनाथ टैगोर, सत्यजीत रे और मां टेरेसा जैसे महान लोगों ने इसे साहित्य, कला और सेवा का शहर बनाया, जिससे इसकी खुशियों की पहचान बढ़ी.

मदर टेरेसा की सेवा भावना

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना यहीं हुई, जिससे कोलकाता को दुनिया ने प्यार और दया का शहर माना.