संजीवनी बूटी

रामायण में कई अद्भुत घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन सबसे रोमांचक घटना है हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने की कहानी.

लक्ष्मण की मूर्छा और संजीवनी बूटी

कथा के अनुसार, जब मेघनाथ ने लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया, तो वैद्यराज ने बताया कि उन्हें ठीक करने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत है.

हनुमान जी का साहस

वैद्यराज ने हनुमान जी को बताया कि यह जड़ी-बूटी हिमालय में पाई जाती है.

द्रोणागिरी पर्वत से उठाया पूरा पहाड़

कथा के अनुसार, हनुमान ने द्रोणागिरी पर्वत से पूरे पहाड़ का हिस्सा उठा लिया क्योंकि जड़ी-बूटियों की पहचान उन्हें पूरी तरह नहीं थी.

जड़ी-बूटियों की पहचान की कमी

क्योंकि हनुमान जी को संजीवनी बूटी की सही पहचान नहीं थी, उन्होंने पूरे पहाड़ को उठाकर लाना ही सुरक्षित समझा.

पर्वत का स्थान

द्रोणागिरी पर्वत आज उत्तराखंड के चमौली जिले में स्थित है और इसका ऊपरी हिस्सा अब भी कटा हुआ दिखाई देता है.

विशेष पूजा और मान्यता

स्थानीय लोग इस पर्वत की विशेष पूजा करते हैं. मान्यता है कि पर्वत के करीब रहने वाले लोग हनुमान जी की पूजा नहीं करते.