माघ मास का धार्मिक महत्व

माघ महीना पुण्य, दान और पवित्र स्नान का माना जाता है. इस दौरान शरीर और मन दोनों की शुद्धि पर विशेष जोर दिया जाता है.

भगवान विष्णु की विशेष पूजा

माघ में भगवान विष्णु के वासुदेव रूप की आराधना की जाती है. साथ ही उगते सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है.

मूली का सेवन वर्जित माना गया है

शास्त्रों के अनुसार माघ मास में कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग जरूरी होता है, जिनमें मूली को विशेष रूप से वर्जित बताया गया है.

शराब के समान माना गया सेवन

धार्मिक मान्यता है कि माघ में मूली खाना ‘मद्य’ यानी शराब के सेवन के बराबर फल देता है, जो पवित्रता के खिलाफ माना गया है.

पूजा-पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता

ग्रंथों में उल्लेख है कि माघ में मूली खाने से पूजा, जप और व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता.

सात्विक भोजन पर दिया जाता है जोर

माघ माह आत्म-शुद्धि का समय है, इसलिए सात्विक और हल्के भोजन को अपनाने की सलाह दी जाती है.

तामसिक श्रेणी में गिनी जाती है मूली

मान्यताओं के अनुसार इस महीने मूली को तामसिक भोजन माना गया है, जो मन की एकाग्रता और साधना में बाधा डाल सकती है.

धन हानि की मान्यता

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ में मूली खाने से पुण्य कर्म घटते हैं और पाप बढ़ते हैं. वहीं एकादशी व प्रतिपदा तिथि पर मूली खाने से धन हानि की भी आशंका बताई गई है.