जालंधर में आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े हुई हत्या ने पूरे शहर की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. इस सनसनीखेज वारदात के बाद न सिर्फ कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं, बल्कि प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. घटना के बाद से जालंधर का सियासी माहौल लगातार गरमाया हुआ है.
हत्या के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग जालंधर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की. इसी दौरान कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली और पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के बीच तीखा टकराव देखने को मिला. विधायक कोटली ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया, जिससे मौके पर ही बहस तेज हो गई.
विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने कहा कि लक्की ओबरॉय को पहले से धमकियां मिल रही थीं और इस बारे में पुलिस को जानकारी दी गई थी. इसके बावजूद उन्हें कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई. उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को वह विधानसभा में उठाएंगे और जवाबदेही तय कराने की मांग करेंगे.
पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा कि पुलिस किसी भी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती. उन्होंने भरोसा दिलाया कि हत्या की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
इस पूरे मामले में पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव अंगद दत्ता ने भी आप सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि लक्की ओबरॉय की हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि बिगड़ती कानून व्यवस्था का नतीजा है. दत्ता ने दावा किया कि यदि समय रहते प्रशासन ने चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता, तो इस वारदात को रोका जा सकता था.
अंगद दत्ता ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को उन्होंने उपायुक्त जालंधर को लिखित रूप में चेतावनी दी थी. पत्र में अवैध ‘प्रेसिडेंटशिप संस्कृति’, हथियारबंद गिरोहों और समानांतर सत्ता केंद्रों की बढ़ती सक्रियता का जिक्र किया गया था. उन्होंने कहा कि चेतावनियों को नजरअंदाज करने का खामियाजा आज जालंधर भुगत रहा है.
इस हत्या के बाद विपक्ष ने आप सरकार की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं प्रशासन इसे जांच में राजनीतिक दखल मान रहा है. साफ है कि लक्की ओबरॉय हत्याकांड ने पंजाब की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.
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