Punjab News: पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने ऐसा दावा किया, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है. उन्होंने कहा कि राज्य में दोबारा सरकार बनाने के लिए उन्हें बम धमाकों का सहारा लेने का प्रस्ताव दिया गया था. इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं और पुराने जख्म फिर से हरे हो गए हैं.
राजिंदर कौर भट्टल ने इंटरव्यू में साफ कहा कि यह प्रस्ताव उन्हें कुछ अधिकारियों की तरफ से मिला था. उनका कहना था कि अगर ट्रेनों या बाजारों में धमाके कराए जाएं, तो माहौल सरकार बनाने के पक्ष में हो सकता है. लेकिन उन्होंने इस सुझाव को तुरंत खारिज कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं लाशों के सहारे शासन नहीं कर सकती.” उन्होंने यह भी बताया कि उस वक्त उन्होंने ऐसे सुझाव देने वाले अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी और साफ शब्दों में मना कर दिया था.
राजिंदर कौर भट्टल के इस बयान के बाद शिरोमणी अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने कड़ा रुख अपनाया है. पार्टी के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह बयान बहुत गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
उनका कहना है कि अगर उस दौर में राजनीति के लिए इस तरह के प्रस्ताव दिए जा रहे थे, तो यह जानना जरूरी है कि बीते वर्षों में हुए धमाकों के पीछे कहीं सियासी मकसद तो नहीं था.
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि वे उन अधिकारियों और सलाहकारों के नाम सार्वजनिक करें, जिन्होंने इस तरह का खतरनाक प्रस्ताव दिया था. उनका कहना है कि जिन लोगों ने राजनीतिक फायदे के लिए पंजाब की शांति से खिलवाड़ करने की सोची, उनके चेहरे जनता के सामने आने चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
इस मामले में बीजेपी ने भी कांग्रेस को घेर लिया है. पंजाब बीजेपी के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि ऐसा प्रस्ताव सिर्फ अधिकारियों ने दिया था. उनका आरोप है कि उस समय कांग्रेस के नेता भी पूरी तरह जिम्मेदार थे. बीजेपी ने कांग्रेस से राजिंदर कौर भट्टल के बयान पर साफ जवाब देने की मांग की है.
राजिंदर कौर भट्टल 21 नवंबर 1996 को पंजाब की मुख्यमंत्री बनी थीं. वह राज्य की पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री हैं. हरचरण सिंह बराड़ के इस्तीफे के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने 11 फरवरी 1997 तक मुख्यमंत्री पद संभाला. उनके ताजा बयान ने एक बार फिर 90 के दशक के पंजाब की राजनीति, हालात और फैसलों पर बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि इस बयान के बाद जांच होती है या यह मामला सिर्फ सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है.
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