पंजाब के वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और पुलिस रिमांड को लेकर दायर याचिका पर अब 4 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 540 करोड़ रुपये की कथित ड्रग मनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में मजीठिया को 25 जून को गिरफ्तार किया।
26 जून को उन्हें मोहाली की अदालत ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था।
फिर 3 जुलाई को रिमांड को 4 दिन के लिए बढ़ा दिया गया।
मजीठिया ने 1 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से हुई है क्योंकि वे सरकार के कटु आलोचक हैं।
उन्होंने कहा कि एफआईआर बेबुनियाद है और गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए की गई।
याचिका में कहा गया कि विजिलेंस ब्यूरो के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, सिर्फ "विदेशी संपर्क", "प्रभाव", और "डिजिटल सबूतों" जैसी आम और काल्पनिक बातें लिखी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले कहा था कि हिरासत में लेकर पूछताछ की ज़रूरत नहीं है।
हाईकोर्ट में यह मामला जज त्रिभुवन दहिया के सामने आया।
उन्होंने मजीठिया के वकील को नया रिमांड आदेश कोर्ट में पेश करने की इजाजत दी और सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया।
मजीठिया पर पहले से ही 2021 में NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज था।
यह केस एंटी-ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स की 2018 की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था।
उन्होंने पहले भी पटियाला जेल में 5 महीने बिताए थे और अगस्त 2022 में जमानत पर रिहा हुए थे।
मजीठिया चाहते हैं कि गिरफ्तारी और रिमांड को अवैध घोषित किया जाए और मामले में सरकार की कार्रवाई पर रोक लगे।
4 जुलाई को हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा।
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