केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 4 जून को हुई जानलेवा भगदड़ के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आरसीबी ने टीम की जीत के बाद निकाली गई विजय परेड के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली थी।
ट्रिब्यूनल की बेंगलुरु पीठ, जिसमें जज बी.के. श्रीवास्तव और प्रशासनिक सदस्य संतोष मेहरा शामिल थे, ने कहा कि आरसीबी की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अचानक लाखों लोग सड़कों पर इकट्ठा हो गए। अनुमान है कि भीड़ की संख्या 3 से 5 लाख के बीच थी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी भीड़ को मैनेज करने के लिए पुलिस को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। 3 जून की रात से ही सड़कों पर लोग इकट्ठा होने लगे थे और पुलिस पहले से ही व्यस्त थी।
इस भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों – बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद, डीसीपी शेखर टेक्कन्नावर और एडिशनल कमिश्नर विकास कुमार को सस्पेंड कर दिया था।
लेकिन आईपीएस अफसर विकास कुमार ने अपने निलंबन के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि पुलिस वाले भी इंसान हैं, वे न भगवान हैं, न जादूगर और न ही उनके पास कोई जादुई चिराग है जिससे वो बिना तैयारी के इतनी बड़ी भीड़ को संभाल सकें।
मुख्य बातें:
आरसीबी ने विजय परेड से पहले पुलिस से अनुमति नहीं ली।
अचानक सोशल मीडिया पर पोस्ट के चलते लाखों लोग इकट्ठा हो गए।
पुलिस को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
ट्रिब्यूनल ने कहा: “पुलिस इंसान है, कोई जादूगर नहीं।”
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