Kharmas 2025: हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को विशेष महत्व दिया गया है. ये समय धार्मिक दृष्टि से बहुत पवित्र माना जाता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब सूर्य गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है. सूर्य और बृहस्पति दोनों मंगल कार्यों से जुड़े ग्रह हैं. इस दौरान इनकी शुभ ऊर्जा कमजोर मानी जाती है. इसलिए इस समय शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार जैसे मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास का समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयुक्त होता है. इस अवधि में बाहरी उत्सव और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन पूजा, साधना और दान के लिए यह अत्यंत उत्तम समय माना जाता है. ये समय आत्मिक शुद्धि और ईश्वर भक्ति का संदेश देता है. खरमास के दौरान सूर्य देव और गुरु बृहस्पति की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. माना जाता है कि इस समय किया गया दान और साधना कई गुना फल देती है.
1. पूजा-पाठ और साधना: इस समय नियमित पूजा, मंत्र जप और धार्मिक अनुष्ठान करना चाहिए. '
2. दान और परोपकार: गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है.
3. आध्यात्मिक अध्ययन: धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और ध्यान करना लाभकारी होता है.
4. स्नान और तप: नियमित स्नान और तप करने से आत्मिक शांति मिलती है.
खरमास में मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. इसमें विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत और मुंडन जैसी गतिविधियां वर्जित होती हैं. ये समय बाहरी उत्सवों के बजाय आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर भक्ति पर केंद्रित रहना चाहिए.
हालांकि खरमास में शादी नहीं होती, लेकिन विवाह से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के उपाय किए जा सकते हैं. जिन लोगों की कुंडली में विवाह दोष हो या जिनकी शादी की बात बार-बार बिगड़ती है, उनके लिए यह समय विशेष फलदायी माना जाता है.
1. सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा: पीले रंग का प्रयोग करें और पीले वस्त्र पहनें.
2. दान और साधना: पीली वस्तुओं का दान करें.
3. मंत्र जाप: 'ॐ श्रीं ह्रीं पूर्ण गृहस्थ सुख सिद्धये ह्रीं श्रीं ॐ नमः' मंत्र का जाप करें.
इन उपायों से मान्यता है कि विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और भविष्य में सुख-समृद्धि आती है.
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार साल में दो बार खरमास लगता है. पहली बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं और दूसरी बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं. मीन और धनु दोनों ही राशियों के स्वामी गुरु बृहस्पति हैं. वर्तमान वर्ष में 16 दिसंबर 2025 को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास शुरू हुआ. इस अवधि में सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं, लेकिन पूजा, दान और साधना का महत्व बढ़ जाता है.
14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास समाप्त हो जाएगा. इसके साथ ही शुभ कार्यों का मार्ग खुल जाएगा. हालांकि जनवरी 2026 में शुक्र ग्रह अस्त रहने के कारण विवाह का कोई भी मुहूर्त सही नहीं है. शुक्र ग्रह का उदय 01 फरवरी 2026 को होगा. इसके बाद ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. इसलिए नए साल में विवाह का सीजन फरवरी 2026 से शुरू होगा.
खरमास 2025 धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत जरूरी है. ये समय बाहरी मांगलिक कार्यों से बचने का है, लेकिन पूजा, दान, साधना और आत्मिक शुद्धि के लिए उत्तम अवसर प्रदान करता है. जो लोग विवाह दोष या अन्य समस्याओं से परेशान हैं, उनके लिए इस अवधि में किए गए उपाय विशेष लाभकारी होते हैं. इसलिए खरमास के दौरान आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान दें, दान और पूजा करें और आने वाले शुभ समय का इंतजार करें.फरवरी 2026 से विवाह और मांगलिक कार्यों की शुरुआत संभव होगी.